केरल के सरकारी अस्पताल में सर्जरी के समय महिला के पेट में छूटी कैंची, 5 साल तक दर्द में रही पीड़िता: X-Ray से खुला राज, स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जाँच के आदेश

केरल के अलप्पुझा स्थित वंदनम सरकारी मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान हुई गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। यहाँ गर्भाशय का ऑपरेशन करने आई एक महिला उषा जोसेफकुट्टी के पेट में स्वास्थ्यकर्मियों ने कैंची छोड़ दी और वो 5 वर्षों तक महिला के पेट में ही पड़ी रही।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, लगातार पेट दर्द और पेशाब में खून आने की शिकायत के बाद जब उषा एक निजी अस्पताल पहुँची तो उनका एक्स-रे कराया गया, जहाँ पर पेट में कैंची होने खुलासा हुआ। राज्य की स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने मामले को बेहद दर्दनाक और अस्वीकार्य बताते हुए सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।

उषा अलप्पुझा के पुन्नप्रा की रहने वाली हैं, 10 मई 2021 को सर्जरी के लिए भर्ती हुई थीं और 12 मई को उनका ऑपरेशन हुआ था। 15 मई को उन्हें छुट्टी दे दी गई। हालाँकि, इसके बाद भी उनके पेट में दर्द बना रहा और वह कई जगह इलाज कराती रहीं लेकिन असली वजह सामने नहीं आई।

हाल ही में एक यूरोलॉजी विशेषज्ञ की सलाह पर कराए गए एक्स-रे में पेट के अंदर लंबी मुड़ी हुई सर्जिकल कैंची दिखाई दी। फिलहाल उषा को कोच्चि के अमृता अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहाँ उनकी सर्जरी की तैयारी की जा रही है।

मंत्री के आदेश पर जाँच और सख्त कार्रवाई

स्वास्थ्य मंत्री वीना जॉर्ज ने बताया कि प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट निदेशक चिकित्सा शिक्षा (DME) को मिल चुकी है। उन्होंने विशेषज्ञ डॉक्टरों की एक टीम गठित करने का आदेश दिया है, जो अलप्पुझा मेडिकल कॉलेज जाकर जाँच करेगी। यह रिपोर्ट पुलिस को भी सौंपी जाएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

मंत्री ने कहा कि जो कर्मचारी अभी सेवा में हैं, उन्हें जाँच पूरी होने तक निलंबित किया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है, जैसे ऑपरेशन के दौरान स्क्रब नर्स की अनुपस्थिति, तो यह गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।

डॉक्टर का दावा, परिवार का आरोप

इस मामले में नाम सामने आने के बाद रिटायर्ड डॉक्टर डॉ ललितांबिका ने दावा किया कि उन्होंने यह सर्जरी नहीं की थी। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पेट में फोर्सेप्स रह जाए तो 50 साल तक भी स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़ता। उनका कहना है कि उषा को खून आने की समस्या मूत्र पथरी के कारण थी, न कि कैंची की वजह से।

हालाँकि, मंत्री ने डॉक्टर के बयान को खारिज करते हुए कहा कि अस्पताल के रिकॉर्ड में ऑपरेशन का पूरा विवरण मौजूद है। उषा के बेटे के अनुसार, उनकी माँ ने कई बार डॉक्टर से मुलाकात भी की थी।

उषा दिहाड़ी मजदूर हैं और उनका परिवार किराए के मकान में रहता है। वहीं, उषा ने कहा कि वह दोबारा वंदनम मेडिकल कॉलेज में इलाज नहीं कराना चाहतीं। मामला की जाँच पुलिस कर रही है और पूरे राज्य में स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं।

Kerala Vandanam Medical College scissors left in woman abdomen five years