सनातन संस्था ने भारत मंडपम में ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ के लिए संस्कृति मंत्रालय द्वारा 63 लाख रुपए दिए जाने के कॉन्ग्रेस के दावों पर प्रतिक्रिया दी है। कॉन्ग्रेस ने दावा किया था जिस कार्यक्रम में मुस्लिम विरोधी बातें की गईं उसके लिए मंत्रालय ने फंडिंग दी है। सनातन संस्था ने इस दावे को नकारते हुए कहा है कि यह पैसा ‘वंदे मातरम’ और छत्रपति शिवाजी के शस्त्रों से जुड़ी प्रदर्शनी के लिए दिया गया था।
सनातन संस्था ने क्या कहा?
सनातन संस्था का कहना है कि उन्होंने अपने रौप्य (रजत) जयंती वर्ष के मौके पर 13 से 15 दिसंबर तक ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ का आयोजन किया था। सनातन संस्था के मुताबिक, इस दौरान भारत मंडपम के निकट हॉल नं. 12 में संस्था ने 3 दिनों तक वंदे मातरम गीत का प्रदर्शन किया था और मुख्य कार्यक्रम में वंदे मातरम का समूह गान किया गया था।
सनातन संस्था के प्रवक्ता अभय वर्तक ने कहा, “कार्यक्रम के साथ प्रदर्शनी भी लगाई गई थी जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के काल के ऐतिहासिक शस्त्र थे। इस प्रदर्शन का उद्घाटन माननीय मंत्रियों के हाथों करने का निर्धारित था और इसके लिए नियमित सरकारी प्रक्रिया से हमने शासन के पास प्रस्ताव प्रस्तुत किया था। उसके अनुसार शासन ने इसे मान्यता दी।” यानी संस्था का तर्क है उन्हें पैसा वंदे मातरम की प्रदर्शन की के लिए मिला था।
१. शासकीय निधि केवल 'वंदे मातरम्' व छ शिवाजी महाराज के शस्त्रप्रदर्शन हेतु थी।
— Chetan Rajhans (@1chetanrajhans) February 20, 2026
२. कोई संविधानविरोधी भाषण नहीं हुआ; हमने केवल हिंदू अधिकारोंपर बात की।
३. किसी न्यायालयने @SanatanSanstha को कभी दोषी नहीं ठहराया है।
४. हमें सांप्रदायिक कहनेवालों पर हम मानहानि का मुकदमा दर्ज करेंगे। https://t.co/BQbX7T5rbd
उनका कहना है कि इसके अलावा बाकी का कार्यक्रम सनातन संस्था के रौप्य महोत्सव का था और इसका नाम ही ‘सनातन राष्ट्र शंखनाद महोत्सव’ था, ना कि कोई हिंदू राष्ट्र का महोत्सव। वर्तक ने कहा, “इस कार्यक्रम में कोई भी भारतीय संविधान विरोधी भाषण नहीं हुआ। कार्यक्रम में आए वक्ताओं ने हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों का पक्ष रखा।”

वर्तक ने कहा, “कॉन्ग्रेस के तेलंगाना राज्य के मुख्यमंत्री संवैधानिक पद पर रहते हुए ‘कॉन्ग्रेस मतलब मुस्लिम और मुस्लिम मतलब कॉन्ग्रेस’ जैसी संविधान विरोधी घोषणा करते हैं। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कई बार नकारे जाने के बावजूद धर्म के आधार पर मुस्लिम समाज को आरक्षण घोषित करते हैं, केरल में कॉन्ग्रेस के नेता बीफ बैन का विरोध करने के लिए सड़क पर गौहत्या करते हैं, क्या ये सब संविधान विरोधी नहीं हैं? इसलिए कॉन्ग्रेस को पहले अपनी पापों को देखना चाहिए।”
वर्तक का कहना है कि हिंदुओं को आतंकवादी बताने वाली थ्योरी गढ़ी गई और इसके लिए सनातन संस्था को झूठे मामलों में फँसाया गया था। उन्होंने कहा, “किसी भी मामले में न्यायालय ने सनातन संस्था को दोषी नहीं ठहराया फिर भी हमें आतंकवादी कहने वाले कॉन्ग्रेस नेताओं पर तथा संबंधित पोर्टल पर हम बदनामी के मुकदमे दायर करेंगे।”

