मध्य प्रेदश के धार में 24 फरवरी 2026 को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर में स्थित कमाल मौला मस्जिद को लेकर वैज्ञानिक रिपोर्ट इंदौर हाई कोर्ट में को सौंपी। ASI ने रिपोर्ट में कहा कि कमाल मौला मस्जिद को प्राचीन मंदिरों के अवशेषों, स्थापत्य, शिल्प और शिलालेखों के टुकड़ों का उपयोग करके बनाया गया था और यह मौजूदा ढाँचा कई सदियों बाद बिना संतुलन और एक समान डिजाइन के तैयार किया गया था।
रिपोर्ट के अनुसार, ASI की टीम ने कुल 94 मूर्तियाँ और मूर्तिकला के हिस्से खोजे हैं, जिनमें भगवान गणेश, ब्रह्मा, नरसिंह, भैरव और तमाम पशु आकृतियाँ भी शामिल हैं और कई हिस्सों पर संस्कृत भाषा के शिलालेख भी मिले हैं, जो 12वीं से 16वीं सदी के माने जा रहे हैं। इन खोजों से यह संकेत मिलता है कि मंदिर शैली की वास्तुकला और कला पहले से यहाँ मौजूद थी।
भोजशाला विवाद पर कोर्ट में सुनवाई
वहीं सोमवार (23 फरवरी 2026) को भोजशाला की कमाल मौला मस्जिद विवाद पर इंदौर हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। इस सुनवाई में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की डिवीजन बेंच ने मामला सुना और ASI की जाँच रिपोर्ट को आगे की प्रक्रिया का आधार बनाया।
कोर्ट ने देखा कि ASI की 98 दिनों में तैयार की गई 2100 पन्नों और 10 खंडों की वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट पहले ही सीलबंद लिफाफे से खोली जा चुकी है और इसकी प्रति सभी पक्षों को पहले ही दी जा चुकी है। इसके बावजूद किसी पक्ष ने अभी तक इस रिपोर्ट पर कोर्ट में आपत्तियाँ, सुझाव या टिप्पणियाँ नहीं दी हैं।
कोर्ट ने दो हफ्तों की मोहलत दी
अदालत ने कहा कि रिपोर्ट में जिन प्राचीन प्रमाणों, शिलालेखों , मूर्तियों, सिक्कों और शोध निष्कर्षों का उल्लेख है, उस पर सभी पक्षों को अपनी लिखित आपत्तियाँ और राय कोर्ट में दो हफ्तों के भीतर पेश करना आवश्यक है। इसीलिए सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को 2 हफ्तों की मोहलत दी गई है।
कोर्ट ने यह भी साफ निर्देश दिया है कि यथास्थिति को बनाए रखा जाए, यानी वर्तमान में चल रही पूजा-नमाज की व्यवस्था में कोई बदलाव वहीं होगा, जब तक कोर्ट का अगला फैसला नहीं आता। अगली सुनवाई 16 मार्च 2026 को होगी, जब कोर्ट इन आपत्तियों और सुझावों पर फैसला सुनेगी।
क्या है भोजशाला विवाद?
बता दें कि भोजशाला विवाद सालों से धार्मिक और ऐतिहासिक रूप से संगीन मामला रहा है। हिंदू समुदय इसे वाग्देवी मंदिर के तौर पर पूजता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। ASI की रिपोर्ट इसी आधर पर तैयार की गई थी और अब कोर्ट ने दोनों समुदायों से अपने दावे और आपत्तियाँ प्रस्तुत करने को कहा है, ताकि अंतिम निर्णय लिया जा सके।

