रियाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए ड्रोन हमले ने मध्य पूर्व में पहले से तनावपूर्ण स्थिति को और गहरा कर दिया है। दो ड्रोन रियाद स्थित अमेरिकी मिशन की इमारत पर 3 मार्च 2026 को जा गिरे। इससे दूतावास परिसर में आग लग गई और भवन को नुकसान पहुँचा।
सऊदी रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि दो ड्रोन अमेरिकी मिशन के ऊपर आकर टकराए, जिससे इमारत के एक हिस्से में आग लग गई और नुकसान पहुँचा है। हालाँकि अभी तक इस हमले में किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों के अनुसार हमले के समय दूतावास को पहले ही खाली करा लिया गया था।
जानकारी के मुताबिक, ड्रोन सुबह के समय अमेरिकी दूतावास के छत और परिसर की दीवारों पर गिरे, जिससे वहाँ भयंकर धुआँ उठता दिखाई दिया और आसमान में काले धुएँ का गुबार छा गया। सऊदी अधिकारियों का दावा है कि आग को जल्द नियंत्रित कर लिया गया है।
इस घटना को ईरान‑समर्थित या ईरान‑संबंधित ताकतों का काम बताया जा रहा है, जो हाल के अमेरिकी और इजरायल हमलों के जवाब में मिसाइल‑ड्रोन अभियान चला रही हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग ने मध्य पूर्व के खतरा बढ़ने के मद्देनजर रियाद, जेद्दा और धाहरान जैसे सऊदी शहरों में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को ‘शेल्टर‑इन‑प्लेस’ की सलाह जारी की है। इसके तहत उन्हें घरों में रहने, बड़े जमावड़ों से दूर रहने और सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों पर भरोसा न करने को कहा गया है।
इसके साथ ही अमेरिकी नागरिकों को विभाग का स्मार्ट ट्रैवलर एनरोलमेंट प्रोग्राम (STEP) में रजिस्टर करने की सलाह दी गई है ताकि आवश्यकता पड़ने पर वे राहत या निकासी के लिए तत्काल संपर्क में रह सकें।
इस बीच, ईरानी स्तर से अमेरिका‑संचालित वार्ता के दावों को सीधे तौर पर ठुकरा दिया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कथित तौर पर यह दावा किया था कि ईरान की ‘नई लीडरशिप’ अमेरिका से बातचीत करना चाहती है और वे भी डिप्लोमैसी के दरवाजे खुले रखने को तैयार हैं, लेकिन ईरान की सुरक्षा परिषद के अधिकारियों ने इस दावे को खारिज कर दिया और साफ कहा कि ‘हम अमेरिका से बात नहीं करेंगे’।
इस बयान से यह संकेत मिल रहा है कि ईरान अभी सीधे बातचीत के लिए तैयार नहीं है और दोनों तरफ से अनौपचारिक संपर्क या निकासी की संभावना फिलहाल कम दिख रही है।
हमले के बाद ट्रंप ने अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में खुली धमकी भरा रुख अपनाया। उन्होंने ईरान के लिए कहा, “आपको जल्द ही पता चल जाएगा कि अमेरिका का जवाब क्या होगा”, लेकिन इसके साथ यह भी स्पष्ट किया कि बड़े पैमाने पर जमीनी सैनिकों की तैनाती संभवतः नहीं होगी।
ट्रंप ने बताया कि अमेरिका ईरान क्षेत्र में बड़े पैमाने पर नुकसान पहुँचा रही है और यह अभियान उनके हिसाब से ‘समय से आगे’ चल रहा है, जबकि युद्ध के खतरे की ओर इशारा करने वाले चेतावनी भरे दावों को नकार दिया।

