पहलगाम आतंकी हमले में निकला ‘चाइनीज कनेक्शन’, रेकी के लिए इस्तेमाल हुआ GoPro चीन में था एक्टिव: अब NIA करेगी बीजिंग से सवाल, गृह मंत्रालय ने दी मंजूरी

पिछले साल (अप्रैल 2025) कश्मीर के पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के हाथ एक बड़ा सुराग लगा है। हमले से पहले बैसारन घाटी की रेकी (जाँच-पड़ताल) के लिए जिस GoPro Hero 12 Black कैमरे का इस्तेमाल आतंकियों ने किया था, उसका सीधा संबंध चीन से निकला है।

जाँच में पता चला है कि यह कैमरा चीन के एक डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए सप्लाई किया गया था और इसे वहीं के डोंगगुआन शहर में एक्टिवेट किया गया था। अब इस साजिश की पूरी परतें खोलने के लिए भारत सरकार ने चीन की ज्यूडिशियरी से आधिकारिक तौर पर मदद माँगी है।

कैसे हुआ कैमरे का खुलासा?

NIA ने अपनी जाँच के दौरान हमले की जगह से मिले इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स की पड़ताल की। इसमें एक गो-प्रो कैमरा मिला, जिसका सीरियल नंबर C3501325471706 है। जब एजेंसी ने इसकी निर्माता कंपनी (GoPro B.V.) से संपर्क किया, तो चौंकाने वाली जानकारी सामने आई।

कंपनी ने बताया कि यह कैमरा चीन के ‘एई ग्रुप इंटरनेशनल लिमिटेड’ को सप्लाई किया गया था और इसे 30 जनवरी 2024 को चीन के डोंगगुआन में चालू (Activate) किया गया था। यानी हमले से करीब सवा साल पहले ही इसे चीन में इस्तेमाल के लिए तैयार कर लिया गया था।

NIA की ‘लेटर रोगेटरी’ और चीन से मदद

चूंकि कैमरे के इस्तेमाल और उसकी खरीद-फरोख्त का पूरा रिकॉर्ड चीन में है, इसलिए जम्मू की विशेष NIA अदालत ने चीन को ‘लेटर रोगेटरी’ (Letter Rogatory) भेजने की मंजूरी दे दी है। यह एक औपचारिक राजनयिक अनुरोध होता है जिसके जरिए एक देश की अदालत दूसरे देश की न्यायपालिका से कानूनी रुप में जवाब माँगा है।

गृह मंत्रालय (MHA) ने भी इस प्रक्रिया को हरी झंडी दे दी है। अब सीबीआई (CBI) की इंटरनेशनल विंग के जरिए यह पत्र चीन भेजा जाएगा ताकि पता चल सके कि इसे किसने खरीदा और यह कश्मीर तक कैसे पहुँचा।

पहलगाम हमला और ‘ऑपरेशन सिंदूर’

याद दिला दें कि 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम के बैसारन मैदान में आतंकियों ने अंधाधुंध गोलीबारी कर एक नेपाली पर्यटक समेत 26 निर्दोष हिंदू लोगों की जान ले ली थी। इस कायरतापूर्ण हमले के जवाब में भारतीय सेना ने पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया था।

इस साल जुलाई में सुरक्षाबलों ने इस हमले में शामिल तीनों आतंकियों ‘सुलेमान शाह, हमजा अफगानी और जिबरान’ को एक मुठभेड़ में ढेर कर दिया था। अब जाँच का मकसद उस बड़े नेटवर्क को पकड़ना है जिसने इन आतंकियों को तकनीकी मदद पहुँचाई।