‘तुम आरोपित हो, सुरक्षा माँगकर मामले को सनसनीखेज मत बनाओ’: उत्तराखंड HC ने नकारी मोहम्मद दीपक की याचिका

उत्तराखंड हाई कोर्ट में कोटद्वार के जिम मालिक ‘मोहम्मद’ दीपक ने एक याचिका दायर की थी, जिस पर HC ने सख्त रुख अपनाते हुए ‘मोहम्मद’ दीपक को जमकर फटकार लगाई है। जस्टिस राकेश थपलियाल की बेंच ने दीपक द्वारा पुलिस सुरक्षा की माँग और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ जाँच की अर्जी को ‘प्रेशर टैक्टिक्स’ (दबाव बनाने की रणनीति) करार दिया।

कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि एक संदिग्ध आरोपित, जिसके खिलाफ दंगों और अपमान करने जैसी धाराओं में FIR दर्ज है, वह पुलिस सुरक्षा की माँग कैसे कर सकता है?

कोर्ट की प्रमुख और सख्त टिप्पणियाँ

जानकारी के अनुसार, जब वकील ने जान का खतरा बताया, तो कोर्ट ने तीखा लहजा अपनाते हुए कहा, “आपसे ज्यादा पुलिस को आपकी सुरक्षा की चिंता है। क्यों? क्योंकि उन्हें जाँच पूरी करके चार्जशीट देनी है। अगर आपको कुछ हो गया, तो चार्जशीट कैसे आएगी?”

कोर्ट ने मोहम्मद दीपक की अतिरिक्त माँगों को खारिज करते हुए कहा कि यह सब जारी जाँच को प्रभावित करने और मामले को ‘सनसनीखेज’ बनाने का प्रयास है। जज ने कहा, “याचिका दायर करते समय आपको अपनी स्थिति (Status) समझनी चाहिए। आप एक संदिग्ध आरोपित हैं।”

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने समर्थक समूहों से मिले पैसों पर भी सवाल किया और पूछा, “अभी तक खाते में कितने पैसे आए?” जवाब में वकील ने ₹80,000 आने की बात कबूल की।

हिंदू संगठनों से जुड़ा मामला

यह मामला 26 जनवरी का है, जब बजरंग दल के सदस्यों द्वारा एक मुस्लिम दुकानदार के ‘बाबा’ नाम इस्तेमाल करने पर आपत्ति जताने के दौरान मोहम्मद दीपक ने हस्तक्षेप किया था। कोर्ट ने कहा कि वह इस मामले को समाज से अलग करके नहीं देख सकते और पुलिस के पास समाज की सुरक्षा के तमाम काम हैं। कोर्ट ने वकील को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि ऐसी याचिकाएँ सबक सिखाने के लिए खारिज कर दी जानी चाहिए।