पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को छह दिन तक चले विस्तारित बजट सत्र के अंतिम दिन राज्य विधानसभा को संबोधित करते हुए पाँच पुलिस अधिकारियों के निलंबन की घोषणा की।
ये अधिकारी पिछली ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कॉन्ग्रेस सरकार के दौरान विवादों में रहे थे और उन पर पक्षपातपूर्ण तरीके से काम करने के आरोप लगे थे। निलंबित अधिकारियों की सूची में एक भारतीय पुलिस सेवा (IPS) अधिकारी और राज्य के विभिन्न हिस्सों में तैनात रहे चार अन्य पुलिस अधिकारी शामिल हैं।
निलंबित अधिकारियों में एक IPS अधिकारी भी शामिल
निलंबित किए गए IPS अधिकारी कोटेश्वर राव हैं, जो पहले दक्षिण 24 परगना के डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पुलिस अधीक्षक रह चुके हैं। राव को तृणमूल कॉन्ग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी का करीबी माना जाता था।
अन्य निलंबित अधिकारियों में मोअज्जेम हुसैन, जो उत्तर दिनाजपुर के कालियागंज थाने के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज थे, सुबर्णा दत्ता चौधरी, जो कोलकाता पुलिस के बर्तला थाने की पूर्व अधिकारी-प्रभारी थीं, साधन पांडे, जो बर्तला थाने में पूर्व सब-इंस्पेक्टर थे और अमलेंदु बिस्वास, जो नदिया जिले के कृष्णानगर थाने के पूर्व इंस्पेक्टर-इन-चार्ज थे, शामिल हैं।
मुख्यमंत्री ने पिछली सरकार के कार्यकाल का किया जिक्र
किसी व्यक्ति का नाम लिए बिना मुख्यमंत्री ने कहा कि 2021 से 2026 तक सत्ता में रही पिछली सरकार के दौरान कई जगहों पर पुलिस तंत्र का दुरुपयोग किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि उस समय सनातन धर्म के अनुयायियों की भावनाओं को ठेस पहुँची थी।
अधिकारी ने कहा कि उनकी सरकार ऐसी किसी भी कार्रवाई को बर्दाश्त नहीं करेगी और साफ किया कि उनके शासन में प्रशासनिक भ्रष्टाचार स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने यही संदेश सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में भी दोहराया।
इससे पहले तीन IPS अधिकारियों पर भी हुई थी कार्रवाई
नई सरकार द्वारा की गई यह पहली कार्रवाई नहीं है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद मई में सत्ता संभालने के तुरंत बाद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने अगस्त 2024 में कोलकाता के सरकारी आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में महिला डॉक्टर के साथ हुए दुष्कर्म और हत्या मामले की जाँच और पुलिस कार्रवाई को लेकर तीन IPS अधिकारियों को निलंबित कर दिया था।
इन अधिकारियों में तत्कालीन कोलकाता पुलिस आयुक्त विनीत कुमार गोयल, तत्कालीन उप पुलिस आयुक्त अभिषेक गुप्ता और तत्कालीन उप पुलिस आयुक्त इंदिरा मुखर्जी शामिल थे। इनके खिलाफ विभागीय जाँच के भी आदेश दिए गए थे। इसी महीने की शुरुआत में राज्य सरकार ने इन तीनों अधिकारियों का निलंबन 120 दिनों के लिए और बढ़ा दिया था।

