अमेरिका-इजरायल द्वारा ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। 19 मार्च 2026 को मध्य ईरान के ऊपर एक कॉम्बैट मिशन के दौरान अमेरिकी वायुसेना का अत्याधुनिक F-35 लाइटनिंग II स्टेल्थ फाइटर कथित तौर पर ईरानी हमले की चपेट में आ गया।
US सेट्रल कमांड के प्रवक्ता कैप्टन टिम हॉकिंस के अनुसार, विमान ने आपातकालीन लैंडिंग की और पायलट की स्थिति फिलहाल स्थिर है। मौजूदा संघर्ष में यह पहली बार है जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से नुकसान पहुँचा है।
ईरान का दावा, स्टेल्थ तकनीक को किया भेदने का दावा
ईरान की इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड क्रॉप्स (Islamic Revolutionary Guard Corps) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेते हुए दावा किया है कि उसके एडवांस्ड एयर डिफेंस सिस्टम ने F-35 जैसे स्टेल्थ फाइटर की क्षमताओं को भेद दिया और विमान को गंभीर नुकसान पहुँचाया।
F-35 लाइटनिंग II, जिसे Lockheed Martin ने विकसित किया है, दुनिया के सबसे आधुनिक स्टेल्थ फाइटर्स में गिना जाता है और इसकी कीमत 100 मिलियन डॉलर से अधिक है। अमेरिका और इजरायल दोनों ही इस विमान का इस्तेमाल ‘ऑपरेशन इपिक फ्यूरी’ (Operation Epic Fury) में कर रहे हैं।
The US empire is in decline.
— Khamenei.ir (@khamenei_ir) March 19, 2026
Feb. 17, 2026 pic.twitter.com/ZqFTXqXjBd
वीडियो वायरल लेकिन अमेरिका ने क्रैश की खबरों को किया खारिज
सोशल मीडिया पर कई वीडियो वायरल हो रहे हैं जिनमें दावा किया जा रहा है कि F-35 क्रैश हो गया, हालाँकि CENTCOM ने इन दावों को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि विमान सुरक्षित रूप से लैंड कर गया और पायलट सुरक्षित है। इस घटना ने अमेरिका की स्टेल्थ तकनीक की मजबूती पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई अमेरिकी नेताओं के बयान सामने आए थे, जिनमें ईरान की सैन्य क्षमता को कम आँकने की बात कही गई थी। अब इस हमले के बाद अमेरिकी जाँच एजेंसियाँ यह पता लगाने में जुट गई हैं कि आखिर स्टेल्थ तकनीक में सेंध कैसे लगी।

