पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच सऊदी अरब ने पाकिस्तान पर दबाव बनाना शुरू कर दिया है। सऊदी चाहता है कि पाकिस्तान युद्ध में ईरान के खिलाफ मोर्चा संभाल ले। सऊदी ने 2025 में दोनों देशों के बीच हुए रक्षा समझौते का हवाला दिया है। इसमें कहा गया है कि सऊदी को जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान सैन्य सहयोग करेगा।
सऊदी अरब को उम्मीद है कि पाकिस्तान की मजबूत और अनुभवी सेना उसकी मदद कर सकती है, खासकर यमन में जमीनी लड़ाई में आई दिक्कतों के बाद। इस डील के तहत सऊदी अरब को पाकिस्तान की परमाणु सुरक्षा छतरी तक पहुँच मिलने की भी बात कही जा रही है, जिससे वह अमेरिका पर निर्भरता कम करना चाहता है।
अगर पाकिस्तान इस संघर्ष में उतरता है, तो वह ईरान की पूर्वी सीमा पर दूसरा मोर्चा खोल सकता है या होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा में भूमिका निभा सकता है। लेकिन पाकिस्तान में ही इसके खिलाफ बवाल हो सकता है। वैसे भी ईरान पर हमला होने के बाद पाकिस्तान में अमेरिका और इजरायल के खिलाफ लगातार धरना प्रदर्शन हो रहे हैं।
पाकिस्तान में बड़ी शिया आबादी है, ऐसे में ईरान के खिलाफ कदम उठाना उसके लिए काफी मुश्किल है। साथ ही अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ेगा, तेल महंगा होगा, विदेशी कमाई घटेगी। सुरक्षा के लिहाज से भी ईरान से लगती 900 किमी की सीमा पर खतरा बढ़ जाएगा, क्योंकि जैसे ही पाकिस्तान युद्ध में कूदेगा, ईरान पाकिस्तान को नहीं छोड़ेगा। ईरान ने इसको लेकर पहले भी चेतावनी दी थी।

