दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार (24 मार्च 2026) को कश्मीरी अलगाववादी आसिया अंद्राबी को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई। इसी मामले में उसकी सहयोगी सोफी फहमीदा और नाहिदा नसरिन को 30-30 साल की कैद दी गई है।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चंदर जीत सिंह ने सजा पर सुनवाई पूरी करने के बाद फैसला सुनाया। इससे पहले 14 जनवरी को तीनों को UAPA की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया था। साथ ही भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गंभीर धाराओं में भी उनकी दोषसिद्धि हुई थी, जिनमें देश के खिलाफ साजिश और समाज में वैमनस्य फैलाने जैसे आरोप शामिल हैं।
Delhi court sentences Kashmiri separatist Asiya Andrabi to life imprisonment in UAPA case.
— Press Trust of India (@PTI_News) March 24, 2026
मामले की जाँच कर रही राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने अदालत से आसिया अंद्राबी के लिए उम्रकैद की माँग की थी। एजेंसी का कहना था कि उन्होंने देश के खिलाफ गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाई और कड़ी सजा जरूरी है ताकि सख्त संदेश दिया जा सके।
जाँच के दौरान सामने आई जानकारी के मुताबिक, अंद्राबी के पाकिस्तान के कई वरिष्ठ नेताओं और अधिकारियों से संपर्क थे। पूछताछ में यह भी सामने आया कि वह कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्तान सरकार पर दबाव बनाने की कोशिश करती थीं और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इसे उठाने की माँग करती थीं।
एजेंसियों के अनुसार, अंद्राबी का संपर्क प्रतिबंधित संगठनों और उनके नेताओं से भी बना हुआ था जिससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई। अदालत ने सभी तथ्यों और सबूतों को ध्यान में रखते हुए यह सजा सुनाई।
कौन है आसिया अंद्राबी?
कश्मीरी अलगाववादी नेता आसिया अंद्राबी लंबे समय से अलगाववादी संगठन दुख्तरान-ए-मिल्लत से जुड़ी रही हैं। NIA ने उसे 5 जुलाई 2018 को उसकी दो सहयोगियों के साथ राष्ट्रविरोधी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया था। अंद्राबी पर कश्मीर में टेरर फंडिंग से लेकर महिलाओं को पत्थरबाजी के लिए भड़काने तक के गंभीर आरोप लगे हैं।
उसके खिलाफ यह भी आरोप है कि वह घाटी में अस्थिरता फैलाने वाली गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं। अंद्राबी पहले भी विवादों में रही है। वर्ष 2015 में एक वीडियो सामने आने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया था, जिसमें वह गाय काटते हुए दिखी थी। इस घटना पर खूब हंगामा हुआ था।
एजेंसियों की जाँच में यह भी सामने आया कि उनके संपर्क पाकिस्तान से जुड़े कुछ तत्वों से थे। बताया गया कि वह एक पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी के माध्यम से प्रतिबंधित संगठनों से जुड़े लोगों के संपर्क में थीं। जाँच में यह भी खुलासा हुआ कि विदेशों में रह रहे उनके कुछ रिश्तेदारों के जरिए उन्हें आर्थिक मदद मिलती थी।
इस पैसे का इस्तेमाल घाटी में विरोध प्रदर्शन और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने में किया गया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह पैसा पत्थरबाजों और अलगाववादी समर्थकों तक पहुँचाया जाता था।
हाफिज सईद मानता है मुँहबोली बहन
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान के आतंकी सरगना हाफिज सईद का भी आसिया अंद्राबी से करीबी संबंध बताया जाता है और वह उसे अपनी मुँहबोली बहन मानता था। इसी बीच, दिल्ली में लाल किला ब्लास्ट से जुड़े मामले में भी उसका कनेक्शन सामने आने की बात कही जा रही थी।
जाँच में यह आशंका जताई गई थी कि दिल्ली ब्लास्ट मामले के आरोपितों के तार दुख्तरान-ए-मिल्लत से जुड़े हो सकते हैं। इस केस में गिरफ्तार आरोपी शहजादा अख्तर पर आरोप है कि वह महिलाओं के इस अलगाववादी संगठन को दोबारा सक्रिय करने की कोशिश कर रहा था।

