पंजाब में ‘नशेड़ियों की जनगणना’ करेगी भगवंत मान सरकार, 28000 कर्मचारी करेंगे 65 लाख परिवारों का सर्वे

पंजाब सरकार ने पहली बार ड्रग और सामाजिक-आर्थिक जनगणना शुरू की है। इस अभियान के तहत करीब 28,000 कर्मचारियों को तैनात किया गया है, जो 65 लाख परिवारों के बीच घर-घर जाकर सर्वे करेंगे। इस जनगणना का उद्देश्य नशे की समस्या और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभाव को परिवार स्तर पर विस्तार से समझना है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने कहा कि इस पहल का मकसद राज्य में नशे की समस्या को गहराई से समझना और नशे के शिकार लोगों व उनके परिवारों की आय, शिक्षा और सामाजिक स्थिति का आँकलन करना है। उन्होंने कहा कि इस डेटा के आधार पर इलाज और पुनर्वास से जुड़ी नीतियों को बेहतर तरीके से तैयार किया जाएगा।

यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है, जब पंजाब में 2027 की पहली तिमाही में होने वाले विधानसभा चुनाव सिर्फ एक साल दूर हैं।

बड़ा अभियान, तीन महीने की समय सीमा

राज्य सरकार ने इस पूरे सर्वे को तीन महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए 2026-27 के वित्तीय वर्ष में 250 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। हर सर्वे करने वाले व्यक्ति को एक ब्लॉक दिया गया है और वह करीब 250 घरों में जाकर जानकारी जुटाएगा।

जिले स्तर पर डिप्टी कमिश्नर को इस अभियान की जिम्मेदारी दी गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में BDO और शहरी इलाकों में सचिव एवं कार्यकारी अधिकारी इसकी निगरानी करेंगे। इसके अलावा भर्ती किए गए वालंटियर, सरकारी कर्मचारी और आउटसोर्स स्टाफ को सर्वे करने के लिए लगाया गया है।

इस सर्वे के लिए राज्य सरकार ने 28,515 हाई-एंड 5G स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया है। ये फोन पहले केंद्र सरकार की मिशन सक्षम आँगनवाड़ी और पोषण 2.0 योजना के तहत खरीदे गए थे। सर्वे पूरा होने के बाद ये फोन आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को दे दिए जाएँगे।

कार्रवाई से इलाज और पुनर्वास की ओर बदलाव

अधिकारियों का कहना है कि इस जनगणना से राज्य में नशे की समस्या की वास्तविक स्थिति सामने आएगी। इससे यह भी पता चलेगा कि लोग किस तरह के नशे का इस्तेमाल कर रहे हैं और उनकी उम्र, शिक्षा और आय जैसी सामाजिक-आर्थिक जानकारी भी मिलेगी। पिछले चार सालों में सरकार का ध्यान मुख्य रूप से कार्रवाई पर रहा था।

मार्च 2025 में राज्य सरकार ने ‘युद्ध नशे के विरुद्ध’ अभियान शुरू किया था। इस दौरान 56,372 ड्रग तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 39,760 FIR दर्ज की गईं। इसके अलावा 2,458 किलो हेरोइन समेत अफीम, चरस, गांजा, ICE, पोस्त और नशीली गोलियाँ भी जब्त की गईं। इसके बावजूद नशे की समस्या राज्य में अब भी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।

पायलट सर्वे और लोगों की प्रतिक्रिया

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पहले 11 गाँवों में पायलट सर्वे किया गया था। इसमें लोगों ने सामाजिक बदनामी की चिंता के बावजूद अधिकारियों के साथ जानकारी साझा करने की इच्छा दिखाई। अधिकारियों के अनुसार, परिवार इस पहल में सहयोग करने को तैयार दिखे और इसे नशे की समस्या से निपटने का एक अच्छा मौका मान रहे हैं।

यह भी याद रखने वाली बात है कि 2017 के विधानसभा चुनाव के दौरान अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान जैसे आम आदमी पार्टी के नेताओं ने राज्य से नशे की समस्या खत्म करने का वादा किया था। पंजाब में नशे का मुद्दा लंबे समय से एक बड़ा राजनीतिक विषय रहा है, जिसे हर पार्टी अपने चुनावी अभियान में उठाती रही है।

हालाँकि चुनावी साल के दौर में इस मुद्दे को उठाने से आम आदमी पार्टी की सरकार पर भी सवाल उठ रहे हैं। लोगों का मानना है कि ये कदम पहले ही उठाने चाहिए थे। ऐसे में इस कदम के कितने सकारात्मक पहलू सामने आते हैं, ये देखने वाली बात होगी।