पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में बुधवार (1 अप्रैल 2026) को भीड़ द्वारा बंधक बनाए गए सात न्यायिक अधिकारियों ने इससे कुछ दिन पहले ही अपनी सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। चार न्यायिक अधिकारियों ने 23 मार्च 2026 को मालदा के जिला मजिस्ट्रेट राजनवीर सिंह कपूर को पत्र लिखकर अपने कार्यालय को स्थानांतरित करने की माँग की थी।
यह पत्र जिला जज के माध्यम से भेजा गया था। इसमें अधिकारियों ने बताया कि जैसे-जैसे पूरक मतदाता सूची के प्रकाशन की तारीख नजदीक आ रही थी, मुस्लिम बहुल कालियाचक-II क्षेत्र के BDO कार्यालय का माहौल लगातार संवेदनशील होता जा रहा था। अधिकारियों ने कहा था कि जिनके नाम सूची से हटाए गए हैं, वे नाराज होकर ड्यूटी में बाधा डाल सकते हैं।
उन्होंने BDO कार्यालय में बुनियादी सुविधाओं की कमी का भी जिक्र किया। खासतौर पर पर्याप्त कार्यस्थल और साफ-सुथरे शौचालयों की कमी, जो कि तीन महिला अधिकारियों के लिए बड़ी समस्या थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि उनमें से पाँच मालदा शहर में रहते हैं, जो करीब 54 किलोमीटर दूर है।
रोजाना आने-जाने में लगभग दो घंटे लगते थे, जिससे न केवल थकान होती थी बल्कि सुरक्षा के लिए लगने वाले संसाधनों पर भी अतिरिक्त दबाव पड़ता था। इसलिए उन्होंने अनुरोध किया था कि उनका कार्यस्थल शहर में, संभव हो तो डीएम कार्यालय के पास स्थानांतरित किया जाए।
स्थानीय प्रशासन ने बचाव कार्य में देरी को किया स्वीकार
सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर विशेष पर्यवेक्षक एन के मिश्रा ने कहा कि अधिकारियों की व्यक्तिगत सुरक्षा में कोई कमी नहीं थी, लेकिन उस दिन स्थानीय प्रशासन की प्रतिक्रिया में देरी हुई। उन्होंने बताया कि बड़ी भीड़ ने BDO कार्यालय के दोनों गेट बंद कर दिए थे, ऐसे में प्रशासन को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए थी, लेकिन इसमें देर हुई।
अब सभी न्यायिक अधिकारियों को मालदा शहर में स्थानांतरित कर दिया गया है और उन्हें केंद्रीय बलों की सुरक्षा दी गई है। उत्तरी बंगाल के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक के जयरामन ने भी माना कि बचाव कार्य में देरी हुई।
उन्होंने कहा कि शुरू में प्रदर्शन शांतिपूर्ण लग रहा था, इसलिए सोचा गया कि अधिकारियों के काम खत्म होने के बाद उन्हें निकाला जाएगा, लेकिन इसमें देर हो गई और उन्हें आधी रात के बाद बाहर निकाला जा सका।
उन्होंने बताया कि इस मामले में रिपोर्ट तैयार की जा रही है और अब सभी अधिकारियों को CAPF की सुरक्षा दी गई है। इस घटना में अब तक 19 मामले दर्ज किए गए हैं और 36 लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
मालदा में भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को बनाया था बंधक
बुधवार (1 अप्रैल 2026) की शाम मालदा जिले के कालियाचक-II क्षेत्र में एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई, जब एक बड़ी भीड़ ने BDO कार्यालय में मौजूद सात न्यायिक अधिकारियों को बंधक बना लिया। इन अधिकारियों में तीन महिलाएँ भी शामिल थीं। गुस्साई भीड़ ने इन अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बनाए रखा।
उनके साथ एक अधिकारी का पाँच साल का बच्चा भी था। इस दौरान अधिकारियों को न तो खाना मिला और न ही पानी। बताया जा रहा है कि यह आक्रोश हाल ही में जारी पूरक मतदाता सूची से कई नाम हटाए जाने को लेकर था। आधी रात के बाद केंद्रीय बलों और पुलिस की मदद से अधिकारियों को बाहर निकाला गया।
हालाँकि भीड़ शांत नहीं हुई और अधिकारियों को ले जा रही गाड़ियों को रोकने के लिए सड़क पर बाँस रख दिए गए। उन पर पत्थर और ईंटें भी फेंकी गईं। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-12 को भी जाम कर दिया, जिससे उत्तर और दक्षिण बंगाल के बीच संपर्क बाधित हो गया।
इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने भी राज्य सरकार की आलोचना की और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा में चूक पर सवाल उठाए। चुनाव आयोग ने मामले की जाँच राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) को सौंप दी है।

