अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अब अंतरिक्ष से मिलने वाली अहम जानकारी पर भी असर पड़ने लगा है। अमेरिकी सैटेलाइट इमेजिंग कंपनी Planet Labs ने ईरान और उसके आसपास के संघर्ष क्षेत्रों की तस्वीरों को अनिश्चितकाल के लिए रोकने का बड़ा फैसला लिया है। Reuters की रिपोर्ट के अनुसार, यह कदम अमेरिकी सरकार के अनुरोध के बाद उठाया गया है।
सैटेलाइट तस्वीरों पर ‘ब्लैकआउट’ क्यों?
Planet Labs ने अपने ग्राहकों को सूचित किया है कि अमेरिकी प्रशासन ने सभी कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी कंपनियों से इस क्षेत्र की तस्वीरें साझा न करने को कहा है। इससे ईरान और आस पास के इलाकों की रियल-टाइम विजुअल जानकारी पर लगभग ‘ब्लैकआउट’ की स्थिति बन गई है।
कंपनी ने बताया कि पहले उसने मिडिल ईस्ट की तस्वीरों पर 14 दिनों की देरी लागू की थी ताकि किसी भी पक्ष को सैन्य फायदा न मिले। लेकिन अब 9 मार्च 2026 से ली गई सभी तस्वीरों को भी रोका जाएगा और यह प्रतिबंध तब तक जारी रहेगा, जब तक संघर्ष खत्म नहीं हो जाता।
युद्ध में सैटेलाइट तकनीक की अहम भूमिका
आधुनिक युद्ध में सैटेलाइट तकनीक बेहद महत्वपूर्ण हो गई है। इसका उपयोग टारगेट पहचानने, मिसाइल गाइडेंस, दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और संचार के लिए किया जाता है। यही वजह है कि ऐसी संवेदनशील जानकारी को खुले तौर पर साझा करना किसी भी पक्ष के लिए जोखिम भरा हो सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान जैसे देश भी कमर्शियल सैटेलाइट डेटा तक पहुँच बनाने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे युद्ध की रणनीतियों पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा पत्रकारों और शोधकर्ताओं के लिए भी ये तस्वीरें दूरदराज के इलाकों की सच्चाई सामने लाने का अहम जरिया होती हैं।
अन्य कंपनियों की प्रतिक्रिया और नियंत्रण
इस बीच सैटेलाइट इमेजिंग क्षेत्र की दूसरी बड़ी कंपनी Maxar Technologies (जिसे अब Vantor के नाम से जाना जा रहा है) ने कहा है कि उसे अभी तक अमेरिकी सरकार से कोई सीधा निर्देश नहीं मिला है। हालाँकि, कंपनी ने यह जरूर माना कि वह पहले से ही संघर्ष के समय ‘एन्हांस्ड एक्सेस कंट्रोल’ लागू करती रही है।
इसके तहत यह तय किया जाता है कि कौन नई तस्वीरें माँग सकता है या किन क्षेत्रों की तस्वीरें खरीदी जा सकती हैं। खासकर वहाँ, जहाँ अमेरिकी सेना या उसके सहयोगी सक्रिय हैं या जो दुश्मनों के निशाने पर हैं। दरअसल यह पूरा घटनाक्रम 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए उस संघर्ष की पृष्ठभूमि में हो रहा है, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमले किए थे।
इसके जवाब में ईरान ने भी खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों और सहयोगी देशों को निशाना बनाया। ऐसे में अब सैटेलाइट से मिलने वाली जानकारी पर नियंत्रण को युद्ध की रणनीति का अहम हिस्सा माना जा रहा है।

