रूसी पनडुब्बियों की जद में समुद्री केबल्स, UK ने 3 को किया ट्रैक: इंटरनेट और पाइपलाइनों को काट बड़ी तबाही ला सकती है पुतिन की सेना

ब्रिटेन ने इस साल की शुरुआत में अपने समुद्री क्षेत्र में लगभग एक महीने तक मौजूद रूसी पनडुब्बियों की गतिविधियों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली के अनुसार, रूस की इन पनडुब्बियों का मकसद ब्रिटेन के समुद्र के भीतर मौजूद अहम केबल और पाइपलाइनों की जासूसी करना था।

हालाँकि, ब्रिटिश सेना और उसके सहयोगियों ने समय रहते इन गतिविधियों को ट्रैक कर लिया और किसी भी संभावित नुकसान को टाल दिया। ब्रिटेन ने साफ किया है कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान किसी भी तरह की इंफ्रास्ट्रक्चर क्षति नहीं हुई और रूसी पनडुब्बियाँ अब उत्तर की ओर बढ़ चुकी हैं।

रूसी गुप्त मिशन पर ब्रिटेन की नजर, 24 घंटे निगरानी का दावा

रक्षा मंत्री जॉन हीली ने बताया कि यह एक सुनियोजित और गुप्त ऑपरेशन था, जिसमें रूस की एक अकुला-क्लास न्यूक्लियर अटैक पनडुब्बी और दो स्पेशल ‘डीप-सी रिसर्च’ पनडुब्बियाँ शामिल थीं, जो मॉस्को की GUGI यूनिट से जुड़ी हैं।

उनके मुताबिक, अकुला-क्लास पनडुब्बी को डिकॉय यानी ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल किया गया, जबकि असली मिशन दो अन्य पनडुब्बियों ने अंजाम दिया, जो समुद्र के भीतर महत्वपूर्ण केबल और पाइपलाइन के ऊपर लंबे समय तक सक्रिय रहीं।

ब्रिटेन ने दावा किया कि उसकी नौसेना एक युद्धपोत निगरानी विमान और सैकड़ों सैनिकों ने मिलकर इन पनडुब्बियों की गतिविधि को ट्रैक किया। नॉर्वे के साथ मिलकर चलाए गए इस ऑपरेशन में 24 घंटे निगरानी रखी गई, जिससे रूस का यह गुप्त मिशन सामने आ गया।

हीली ने सीधे तौर पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को चेतावनी देते हुए कहा कि “हम आपकी गतिविधियों को देख रहे हैं। हमारी केबल और पाइपलाइनों को नुकसान पहुँचाने की किसी भी कोशिश को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और इसके गंभीर परिणाम होंगे।”

उन्होंने यह भी कहा कि रूस चाहता है कि दुनिया का ध्यान मध्य पूर्व की स्थिति खासकर ईरान, अमेरिका और इजरायल के तनाव की ओर भटका रहे, लेकिन ब्रिटेन और उसके सहयोगी रूस को ही अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती मानते हैं और उस पर नजर बनाए हुए हैं।