चीन की सुरक्षा में बड़ी सेंध, हैकरों ने चुरा लिया मिसाइल से लेकर डिफेंस फाइल्स तक का डाटा: अब सब कुछ डार्क वेब पर बिक्री के लिए उपलब्ध

चीन को लेकर एक बड़ा साइबर सुरक्षा खतरा सामने आया है, जहाँ एक हैकर ने सरकारी सुपरकंप्यूटिंग सेंटर से बेहद संवेदनशील डेटा चुरा लिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, यह डेटा लीक 10 पेटाबाइट से ज्यादा का है।

जिसमें रक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेज, मिसाइल डिजाइन और हाई क्वालिटी रिसर्च शामिल हैं। अगर यह दावा सही साबित होता है, तो इसे चीन के इतिहास के सबसे बड़े डेटा ब्रीच में से एक माना जा सकता है।

महीनों से चल रहा था टियांजिन सुपरकंप्यूटिंग सेंटर से डेटा चोरी का खेल

रिपोर्ट के अनुसार, यह डेटा तियानजिन में राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग केंद्र (NSCC) से लीक हुआ हो सकता है, जो 2009 में स्थापित चीन का पहला सुपरकंप्यूटिंग हब है। यह सेंटर देशभर के 6000 से अधिक क्लाइंट्स को सेवाएँ देता है, जिनमें रक्षा, एयरोस्पेस और वैज्ञानिक अनुसंधान से जुड़े संस्थान शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि फ्लेमिंगचाइना नाम से सक्रिय हैकर ने इस डेटा को कई महीनों तक बिना पकड़े धीरे-धीरे निकाला। उसने एक VPN डोमेन के जरिए सिस्टम में प्रवेश किया और ऑटोमेटेड टूल्स का इस्तेमाल करते हुए करीब छह महीने तक डेटा को निकलता रहा। छोटे-छोटे हिस्सों में डेटा निकालने की वजह से यह गतिविधि लंबे समय तक पकड़ में नहीं आई।

लीक हुए डेटा में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, सैन्य रिसर्च, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और फ्यूजन सिमुलेशन जैसे संवेदनशील क्षेत्र शामिल बताए जा रहे हैं। साथ ही, यह डेटा एविएशन इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना, कमर्शियल एयरक्राफ्ट कॉर्पोरेशन ऑफ चाइना और नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ डिफेंस टेक्नोलॉजी जैसे प्रमुख संस्थानों से जुड़ा हो सकता है।

हालाँकि इस पूरे दावे की पुष्टि अभी नहीं हो सकी है, लेकिन साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों ने लीक हुए सैंपल में सीक्रेट लेबल वाले दस्तावेज और सैन्य तकनीक से जुड़े फाइल्स देखे जाने की बात कही है। यह डेटा कथित तौर पर क्रिप्टोकरेंसी के जरिए लाखों डॉलर में बेचा जा रहा है।