2002 गुजरात दंगा: अदालत ने 9 हिंदुओं को किया बरी, पत्थरबाजी और हिंसा भड़काने के आरोप नहीं हुए साबित

2002 के गुजरात दंगों से जुड़े एक अहम मामले में अहमदाबाद की एक स्थानीय अदालत ने 9 हिंदुओं को बरी कर दिया है। इन लोगों पर दंगे, गैरकानूनी तरीके से इकट्ठा होने और पत्थरबाजी करने के आरोप लगाए गए थे। जानकारी के अनुसार, पुलिस ने 9 मई 2002 को अहमदाबाद के माधवपुरा इलाके में पत्थरबाजी और दंगा करने के आरोप में कुल 11 हिंदुओं के खिलाफ मामला दर्ज किया था।

इस मामले की सुनवाई के दौरान यह सामने आया कि जिन 11 लोगों पर आरोप लगे थे उनमें से 2 की पहले ही मौत हो चुकी है। वहीं, अदालत में पेश हुए 4 गवाह 23 साल बाद आरोपितों की पहचान नहीं कर सके। इन परिस्थितियों को देखते हुए अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट डीजे परमार ने 9 आरोपियों को बरी कर दिया।

अदालत ने अपने फैसले में कहा, “सभी तथ्यों पर विचार करने के बाद मैं इस निष्कर्ष पर पहुँचा हूँ कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में नाकाम रहा है कि 9 मई 2002 को दोपहर 2:15 से 2:45 बजे के बीच आरोपी गैरकानूनी रूप से इकट्ठा हुए थे, उनका मकसद दंगा करना था, दूसरे धर्म के लोगों की जान-माल को नुकसान पहुँचाना था या पत्थरबाजी कर सांप्रदायिक तनाव फैलाना था।”

गौरतलब है कि 2002 में गुजरात में उस समय दंगे भड़क गए थे, जब गोधरा में ट्रेन जलाए जाने की घटना हुई थी। गोधरा रेलवे स्टेशन के पास साबरमती एक्सप्रेस की 2 बोगियों में आग लगा दी गई थी जिसमें 59 हिंदू श्रद्धालुओं की जलकर मौत हो गई थी। इस मामले में कुल 31 लोगों को दोषी पाया गया था। इनमें से 11 को 1 मार्च 2011 को एक विशेष फास्ट ट्रैक अदालत ने फाँसी की सजा सुनाई थी। हालाँकि, अक्टूबर 2017 में उनकी सजा को उम्रकैद में बदल दिया गया। इसके अलावा, बाकी 20 दोषियों को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।