भगवान गणेश के जन्म पर उठाए सवाल, प्रभु कृष्ण पर की भद्दी बात: नासिक TCS स्कैंडल में FIR से खुलासा- मुस्लिम सहकर्मी यौन उत्पीड़न के साथ कर रहे थे हिंदू देवी-देवताओं का अपमान भी

नासिक के टीसीएस के बीपीओ सेंटर में महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न और धर्मांतरण के दबाव का तरीका का पैटर्न एक जैसा था। मुंबई नाका पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई कई एफआईआर से यह बात सामने आई है। FIR नंबर 0163, 0165, और 0167 में बदसलूकी की बात कही गई है। महिला कर्मचारियों का दावा है कि उन्हें लंबे समय तक बेइज्जत किया गया, गाली-गलौज की गई और डराया-धमकाया गया।

FIR नंबर 0163 के मुताबिक, शिकायत करने वाली महिला ने बताया कि सीनियर सहकर्मी ने दूसरों के सामने उसके शरीर और पर्सनल लाइफ के बारे में गलत कमेंट किए, जिससे उसे शर्मिंदगी उठानी पड़ी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, ऐसे कमेंट सिर्फ एक बार नहीं हुआ, बल्कि बार-बार की गई। सीनियर कर्मचारी के इस व्यवहार ने उसकी मेंटल हेल्थ और प्रोफेशनल कॉन्फिडेंस को कमजोर किया। उसे अपने कार्यस्थल पर ऐसे कमेंट सहने के लिए मजबूर किया गया।

FIR नंबर 0165 आरोपों से एक और बात जुड़ जाता है। इसमें बताया गया है कि कैसे एक महिला कर्मचारी को उसके सहकर्मियों ने गंदी और अश्लील बातें सुननी पड़ी। शिकायत करने वाली महिला ने कहा कि ऑफिस के माहौल में उसके पर्सनल रिश्तों के बारे में सवाल पूछे जाते थे और उसके कैरेक्टर पर सवाल उठाए जाते थे।

इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि अश्लील बातें सिर्फ पर्सनल रिश्तों को लेकर नहीं की गई, बल्कि उसके धर्म का भी अपमान किया गया। एक सहकर्मी ने भगवान गणेश और भगवान कृष्ण सहित हिंदू देवी-देवताओं के बारे में अपमानजनक और भद्दी टिप्पणियाँ की। पीड़ित ने कहा है कि उसकी हिंदू मान्यताओं का लगातार मजाक उड़ाया जाता था। भगवान शिव के अस्तित्व का मजाक उड़ाते हुए कहते थे कि उसे हाथी के सिर वाले हिंदू भगवान गणेश के पिता पर शक है।

पीड़िता के मुताबिक, ऐसी बातें धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने के लिए की जाती थी। इससे वर्कप्लेस का माहौल काफी खराब हो जाता था।

FIR नंबर 0167 में एक आरोपित का नाम लेते हुए कहा गया है कि उसे काफी समय तक बार-बार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। पुलिस रिकॉर्ड बताते हैं कि ये घटनाएँ एक ही ऑफिस में हुईं, जिससे पता चलता है कि कई कर्मचारियों को एक जैसे अनुभव हुए होंगे।

कुल मिलाकर, ये FIR सिर्फ अलग-अलग गलत व्यवहार नहीं, बल्कि कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न और धार्मिक भावना को ठेस पहुँचाने की कोशिश की जाती थी। यहाँ इतना आपत्तिजनक माहौल था, लेकिन इस पर कोई रोक नहीं थी।

पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत अपराध दर्ज किए हैं, जिनमें यौन उत्पीड़न, अपमान और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने से जुड़े नियम शामिल हैं। मामले की जाँच अभी जारी है।

इस मामले ने बड़े कॉर्पोरेट स्थलों में महिलाओं की सुरक्षा और जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। क्योंकि ऐसे बीपीओ में काम का दबाव होता है और सहकर्मी के साथ लोग घंटों बिताते हैं। अगर ऐसा माहौल होगा तो सचमुच सबके लिए चिंता का विषय है।