लोकसभा में गिरा महिला आरक्षण बिल, 278 वोटों के विरोध में पड़े 211 मत: 2 तिहाई बहुमत था जरूरी, NDA ने बुलाई मीटिंग

लोकसभा में महिला आरक्षण विधेयक यानी 131वें संविधान संशोधन बिल पर वोटिंग हुई। बिल के पक्ष में 278 वोट पड़े जबकि विरोध में 211 वोट पड़े। बिल दो तिहाई बहुमत हासिल नहीं कर सका और सदन के फ्लोर पर गिर गया। एनडीए ने इस मामले पर मीटिंग बुलाई है।

उद्धव गुट की सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एक्स पर लिखा कि भारत की उन महिलाओं के लिए यह दुखद दिन है जो संसद या विधानसभा में जाने की उम्मीद कर रही थीं।

गृह मंत्री अमित शाह ने सदन को संबोधित करते हुए कहा कि महिलाओं के आरक्षण के लिए जिससे लड़ना पड़े लड़ेंगे लेकिन उनका हक दिलाकर रहेंगे। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाते हुए कहा कि कांग्रेस और विपक्ष हमेशा हमारे द्वारा लाए गए सभी बिल और कानून का विरोध किया। उन्होंने कहा हमने 370 हटाया इन्होंने विरोध किया राम मंदिर बनाया इन्होंने विरोध किया तीन तलाक हटाया इन्होंने विरोध किया सर्जिकल स्ट्राइक किया इन्होंने विरोध किया।

अमित शाह ने आगे कहा कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2029 तक महिला सशक्तिकरण का वादा पूरा करने जा रहे हैं। मैं वादा करता हूँ कि 2029 का लोकसभा चुनाव महिला आरक्षण के साथ ही पूरा होगा।

संख्या बल में कैसे पीछे रह गई एनडीए सरकार?

लोकसभा में एनडीए के पास 293 सांसद हैं जबकि विपक्ष के पास 233 सांसद हैं। संवैधानिक संशोधन के लिए उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो तिहाई बहुमत जरूरी है। अगर सभी 540 सदस्य उपस्थित रहें तो 360 वोट चाहिए थे। एनडीए को विपक्षी दलों का समर्थन या उनकी अनुपस्थिति चाहिए थी। समाजवादी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस और डीएमके जैसे दलों की भूमिका निर्णायक हो सकती थी। हालाँकि इन दलों ने ऐसा नहीं किया और बिल लोकसभा में गिर गया।

बता दें कि लोकसभा में पास नहीं होने की स्थिति में अब ये बिल राज्यसभा में पेश नहीं किया जाएगा। राज्यसभा में भी दो तिहाई बहुमत की जरूरत पड़ेगी, जहाँ सरकार के पास संख्याबल नहीं है। इस मुद्दे पर सर्वदलीय एकजुटता की जरूरत थी, लेकिन सरकार की तमाम दलीलों के बावजूद विपक्षी दल इस बिल पर सरकार के साथ नहीं आए।