विदेशों में बैठे रहे मुल्ला-मौलाना, फर्जी बायोमेट्रिक हाजरी से निकलती रही सैलरी: पढ़िए UP के मदरसों में कैसे हुआ पूरा घोटाला

उत्तर प्रदेश के सरकारी सहायता प्राप्त मदरसों में फर्जी बायोमेट्रिक अटेंडेंस के जरिए वेतन निकालने का चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कई मदरसों में गैरहाजिर शिक्षकों को प्लास्टिक कार्ड और फर्जी तरीके से उपस्थित दिखाकर उनकी सैलरी निकाली जा रही थी।

बताया जा रहा है कि विभागीय निगरानी की कमी और ऑनलाइन फेस रिकग्निशन सिस्टम न होने के कारण यह खेल लंबे समय से चलता रहा। आज तक की रिपोर्ट में सामने आए वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि मदरसों में कार्ड के जरिए हाजिरी लगाई जा रही है। आरोप है कि कई कर्मचारी शिक्षकों के कार्ड का इस्तेमाल कर फर्जी उपस्थिति दर्ज करते रहे।

खुलासे के बाद सरकारी अधिकारियों ने जाँच की बात कही है। बाराबंकी के मैलारायगंज स्थित मदरसा इस्लामिया स्कूल में करीब 20 शिक्षकों की बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज होती है, जहाँ अँगूठे के निशान के जरिए अटेंडेंस लगाई जाती है। हालाँकि यह सिस्टम किसी ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से जुड़ा नहीं है और इसकी नियमित प्रशासनिक निगरानी भी नहीं हो रही थी।

विदेश में रहने वाले लोगों के नाम पर भी निकली सैलरी

जाँच में यह भी सामने आया कि शमशुद हूला खान नाम का व्यक्ति 10 साल से ब्रिटेन में रह रहा था, लेकिन इसके बावजूद उसे मदरसे से वेतन और भत्ते मिलते रहे। इतना ही नहीं उसे स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति योजना (VRS) का भुगतान और बाद में पेंशन भी दी गई। जबकि मदरसे की ओर से आधिकारिक रूप से VRS जैसी किसी योजना से इनकार किया गया था।

यह मामला ATS की जाँच के दौरान सामने आया। इसी तरह कुशीनगर के एक मदरसे में प्रशासक की बेटी को शिक्षक के रूप में नियुक्त किया गया। आरोप है कि वह दुबई में रह रही थी, लेकिन फर्जी अटेंडेंस लगाकर दो महीने तक वेतन और भत्ते लेती रही।

वहीं जौनपुर के मझगाँव स्थित अबरा-ए-राहत मदरसे में प्रशासक बाबर कुरैशी के बेटे के अँगूठे के निशान का इस्तेमाल कर 4 शिक्षकों की फर्जी उपस्थिति दर्ज की गई।

हाई कोर्ट के आदेश के बावजूद नहीं लागू हुआ ऑनलाइन सिस्टम

मामला सामने आने के बाद अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के निदेशक ने जाँच शुरू कर दी है। राज्य के संयुक्त निदेशक के मुताबिक सभी मदरसों में बायोमेट्रिक उपस्थिति अनिवार्य है। जिला स्तर पर अल्पसंख्यक अधिकारी अटेंडेंस रिकॉर्ड तैयार करते हैं, जिसके आधार पर शिक्षकों को वेतन जारी किया जाता है।

इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सभी मदरसों में ऑनलाइन अटेंडेंस सिस्टम लागू करने का आदेश दिया था। बायोमेट्रिक उपस्थिति को ऑनलाइन सत्यापन से जोड़ने के लिए एक समिति भी बनाई गई थी। लेकिन आरोप है कि इन आदेशों के बावजूद कई जगह केवल औपचारिकता के तौर पर मशीनों में हाजिरी दर्ज की जा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक, जिन लोगों के नाम पर उपस्थिति दिखाई जाती थी, उनसे पहले ही अँगूठे के निशान ले लिए जाते थे। बाद में मशीन से निकाले गए रिकॉर्ड को साधारण कागज पर प्रिंट कर सरकार को भेज दिया जाता था, ताकि यह दिखाया जा सके कि मदरसे में शिक्षक नियमित रूप से मौजूद हैं।