अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री रास्तों को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। मामला तब और गरमा गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक रैली में अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई की तुलना समुद्री डाकुओं (पाइरेट्स) से कर दी।
Trump on US Navy Seizing Ships:
— Acyn (@Acyn) May 2, 2026
It’s a very profitable business. We’re like pirates. pic.twitter.com/erWDQmJWnw
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना संदिग्ध जहाजों को रोककर उनका तेल और माल जब्त कर लेती है और इसे उन्होंने फायदेमंद कारोबार बताया। उनके इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विवाद खड़ा हो गया है। ईरान ने इसे सीधे तौर पर कानूनी चोरी और समुद्री डकैती करार दिया है।
अमेरिकी कार्रवाई और ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
अमेरिका का दावा है कि वह ईरान से जुड़े तेल ले जा रहे जहाजों को रोककर अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत कार्रवाई कर रहा है। हाल ही में दो टैंकरों को रोके जाने के बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि अमेरिका समुद्री कानूनों की आड़ में समुद्री डकैती को वैध ठहराने की कोशिश कर रहा है। उनका कहना है कि दुनिया आज नए जमाने के समुद्री लुटेरों को देख रही है। इस पूरे मामले ने पश्चिम एशिया में पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना टकराव का केंद्र
इस पूरे विवाद का केंद्र स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है, जो दुनिया के तेल आपूर्ति का एक बेहद अहम समुद्री रास्ता है। बताया जा रहा है कि ईरान ने इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और केवल अपने जहाजों को ही आसानी से गुजरने दे रहा है।
वहीं अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों की ओर जाने वाले जहाजों पर रोक लगानी शुरू कर दी है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक अब तक कई जहाजों को वापस मोड़ा जा चुका है। पेंटागन ने साफ कहा है कि यह कार्रवाई तब तक जारी रहेगी जब तक हालात सामान्य नहीं हो जाते।

