3 बच्चों के सामने आबिद-शफाकत अली ने किया था फ्रांसीसी महिला का बलात्कार, 6 साल बाद दोनों को HC ने सुनाई फाँसी की सजा: पाकिस्तान की घटना

पाकिस्तान की लाहौर हाईकोर्ट ने 2020 में हुए चर्चित मोटरवे गैंगरेप केस में दोनों आरोपितों के फाँसी की सजा बरकरार रखी है। लाहौर के पास फ्रांसीसी मूल की एक पर्यटक के साथ एक मोटरवे पर उस वक्त गैंगरेप किया गया जब कार का फ्यूल खत्म होने के बाद वह अपने तीन बच्चों के साथ उसमें बैठी थी।

दरिंदों ने उसे कार की खिड़की का शीशा तोड़कर जबरदस्ती उसे खींचा और उसके बच्चों के सामने गैंगरेप किया। दोनों दरिंदों आबिद अली और शफकत अली को निचली अदालत ने दोषी माना था और उसे फाँसी की सजा थी। इसके बाद दोनों ने लाहौर हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

लाहौर हाई कोर्ट ने बुधवार (3 जून 2026) को आबिद अली और शफकत अली की अपील खारिज कर दी। दोनों लोगों ने 2021 के एंटी-टेररिज्म कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें उन्हें गैंगरेप, अपहरण, लूट से जुड़े अपराधों का दोषी पाया गया था।

लाहौर मोटरवे केस क्या था

9 सितंबर 2020 को पाकिस्तानी मूल की एक फ्रेंच टूरिस्ट अपने तीन बच्चों के साथ सियालकोट लाहौर मोटरवे पर सफर कर रही थी। देर रात कार का पेट्रोल खत्म हो गया और तीनों बच्चों के साथ सड़क किनारे कार में वह बैठी थी। वह मदद का इंतजार कर रही थी। अचानक दो लोगों ने कार में छाँकने की कोशिश की। उनके पास बंदूकें थी। वे लोग शीशा तोड़ने लगे। महिला को गाड़ी से बाहर खींचा और बच्चों के सामने उसका गैंगरेप किया। इतना ही नहीं परिवार के पास जितने पैसे, गहने या कीमती सामान थे, वे सभी ले गए।

इस घटना की दुनियाभर में आलोचना हुई थी। पाकिस्तान में भी काफी विरोध प्रदर्शन हुआ। ये गुस्सा तब और ज्यादा भड़क गया था जब तत्कालीन पुलिस प्रमुख उमर शेख ने महिला पर ही सवाल खड़े करने की कोशिश की कि वह रात में सफर क्यों कर रही थी और उसे दूसरा तरीका चुनना चाहिए था।

भारी दबाव के बीच पाकिस्तान की पुलिस ने हमलावरों को मोबाइल फोन डेटा की मदद से पकड़ा। क्राइम वाली जगह से लिए गये डीएनए सैंपल मैच कराए और आरोपितों की पहचान कर ली। पुलिस के सामने इनलोगों ने अपना गुनाह भी कबूल लिया।