दरवाजा खटखटा रहा ‘गॉडजिला एल नीनो’, खेती पर डालेगा बुरा असर: जानें इस मौसम के खतरे से महँगाई-बिजली कैसे होगी प्रभावित?

प्रशांत महासागर में हजारों किलोमीटर दूर समुद्र के पानी का बढ़ता तापमान अब भारत के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। वैज्ञानिकों के मुताबिक 11 जून 2026 में एक बेहद शक्तिशाली एल नीनो विकसित हो रहा है, जिसे अनौपचारिक तौर पर ‘गॉडजिला एल नीनो’ कहा जा रहा है।

मौसम एजेंसियों का अनुमान है कि यह साल के अंत तक और 2027 की शुरुआत तक सक्रिय रह सकता है। इसका सबसे बड़ा असर भारत के मानसून, खेती, जल भंडार और बिजली व्यवस्था पर पड़ सकता है।

कमजोर मानसून से खेती पर बड़ा खतरा

भारत की करीब आधी कृषि भूमि अब भी मानसून की बारिश पर निर्भर है। ऐसे में अगर एल नीनो के कारण बारिश कम होती है या लंबे समय तक सूखा जैसा माहौल बनता है तो किसानों को सबसे ज्यादा नुकसान झेलना पड़ सकता है।

मौसम विभाग (IMD) ने 2026 के मानसून को सामान्य से कमजोर रहने की आशंका जताई है। अनुमान है कि इस बार मानसून लॉन्ग टर्म एवरेज रेनफॉल (LPA) का केवल 90 प्रतिशत रह सकता है।

कम बारिश के कारण धान, दाल, सोयाबीन, कपास और मक्का जैसी खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। किसानों को बुवाई में देरी करनी पड़ सकती है या कम पानी वाली फसलों की ओर रुख करना पड़ सकता है। इसके अलावा 44 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान और मिट्टी में नमी की कमी से बीजों के विकास पर भी असर पड़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अनियमित बारिश और गर्मी की वजह से एफिड्स, व्हाइटफ्लाई और थ्रिप्स जैसे कीटों का प्रकोप बढ़ सकता है, जिससे कपास और सब्जियों की फसल को अतिरिक्त नुकसान होने का खतरा है। यदि उत्पादन घटता है तो दालों और अनाज जैसी जरूरी खाद्य वस्तुओं की कीमतें भी बढ़ सकती हैं।

पानी, बिजली और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर

एल नीनो का असर सिर्फ खेतों तक सीमित नहीं रहेगा। कम बारिश होने पर जलाशयों और नदियों में पानी का स्तर घट सकता है, जिससे पीने के पानी की उपलब्धता और जलविद्युत उत्पादन प्रभावित हो सकता है। कई शहर पहले से ही जल संकट का सामना कर रहे हैं और स्थिति और गंभीर हो सकती है।

दूसरी ओर गर्म मौसम के कारण पंखे, कूलर और एयर कंडीशनर का इस्तेमाल बढ़ेगा, जिससे बिजली की माँग में और इजाफा होगा। भारत में हाल के वर्षों में बिजली की माँग लगातार रिकॉर्ड स्तर पर पहुँची है। ऐसे में यदि गर्मी लंबी चली और बारिश कम हुई तो बिजली ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 का गॉडजिला एल नीनो भारत के लिए सिर्फ एक मौसमी घटना नहीं है। इसका असर खेती, पानी, बिजली और आम लोगों के घरेलू बजट तक महसूस किया जा सकता है। यही वजह है कि इस साल दुनिया भर के वैज्ञानिक और मौसम एजेंसियाँ इस पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।