बंगाल में हार की हताशा झेल रही TMC के काले कारनामों का अब खुलासा हो रहा है। पहले फर्जी दस्तखत घोटाले में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी से CID ने 6 घंटे पूछताछ की। अब CID, ईडी और पुलिस ने विधायक मदन मित्रा पर शिकंजा कस दिया है। पुलिस ने मदन मित्रा के 7 ठिकानों पर छापा मारा और महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए हैं।
कमारहाटी के विधायक मदन मित्रा पर नगर पालिका भर्ती घोटाले का आरोप है। बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट की टीम ने विधायक मदन मित्रा के आवास ‘उदय विला’ पर धावा बोला। वहाँ ताला लटका था, लेकिन पुलिस ने जरा भी रियायत नहीं दिखाई। पुलिस ने सीधे ताला तोड़ा और भीतर घुसकर एक घंटे तक चप्पा-चप्पा छान मारा।
मदन मित्रा का यह ठिकाना सिर्फ फर्जीवाड़े का अड्डा नहीं, बल्कि अवैध कब्जे की जीती-जागती मिसाल है। आरोप है कि यह पूरी इमारत केंद्र सरकार की एजेंसी की जमीन पर कब्जा करके बनाई गई है। पुलिस अब इस लैंड जिहाद और अवैध निर्माण की कुंडली खंगाल रही है। मौके से कई गोपनीय कागजात भी बरामद हुए हैं।
क्यों मची है खलबली? क्या है वो फर्जीवाड़ा
बंगाल चुनाव में करारी हार के बाद ममता बनर्जी के घर पर एक गुपचुप बैठक हुई थी। इस बैठक में नेता प्रतिपक्ष चुनने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए। बैठक में विधायक पहुँचे नहीं, लेकिन कागजों पर उनके फर्जी दस्तखत ठोक दिए गए। अब इसी जालसाजी का हिसाब कानून माँग रहा है।
भाजपा की प्रचंड जीत और शुभेंदु अधिकारी के मुख्यमंत्री बनते ही TMC ताश के पत्तों की तरह ढह रही है। ममता बनर्जी के घर बुलाई गई विधायक दल की बैठक में 60 में से 80 विधायक गायब रहे। डर के मारे बैठक रद्द करनी पड़ी। दावा है कि जल्द ही TMC के 50 विधायक और 20 सांसद पार्टी छोड़ देंगे। खेल अब खत्म हो चुका है।

