गुजरात सरकार ने दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले गरीब बच्चों की पढ़ाई के लिए एक बहुत ही अनोखी योजना शुरू की है। राज्य सरकार ने 28 पुरानी सरकारी बसों को खूबसूरत चलता-फिरता स्कूल बना दिया है। ये सभी बसें सौर ऊर्जा यानी धूप से मिलने वाली बिजली से चलती हैं।
मंगलवार (24 जून 2026) को राज्य के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने गाँधीनगर से इन बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इन बसों को स्थानीय लोग ‘रणशाला’ और आधिकारिक रूप से ‘स्कूल ऑन व्हील्स’ कह रहे हैं।
कबाड़ हो चुकी बसों से बनाईं सुंदर क्लासरूम
यह योजना गुजरात के नमक बनाने वाले ‘अगरिया’ समुदाय के बच्चों के लिए है। ये परिवार हर साल नमक के काम के लिए अपने घरों से दूर चले जाते हैं। इस वजह से उनके बच्चों की स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छूट जाती थी।
बच्चों की इसी समस्या को खत्म करने के लिए शिक्षा विभाग और राज्य परिवहन निगम ने हाथ मिलाया है। सरकार ने अपनी पुरानी और कबाड़ हो चुकी बसों की मरम्मत करके उन्हें बहुत ही सुंदर और आधुनिक स्कूलों में बदल दिया है। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे बेकार पड़ी सरकारी संपत्ति का सही इस्तेमाल हुआ है।
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— GSRTC (@OfficialGsrtc) June 23, 2026
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एक बस में 20 से ज्यादा बच्चे साथ पढ़ेंगे
इस योजना के तहत 6 साल से 14 साल तक के बच्चों को पढ़ाया जाएगा। हर एक बस के अंदर 20 से ज्यादा बच्चों के बैठने की बढ़िया व्यवस्था की गई है। इन बसों में पढ़ाई के लिए 43 इंच की बड़ी स्मार्ट टीवी और डिश टीवी लगाई गई है।
इस टीवी के जरिए बच्चे ऑनलाइन क्लास और पढ़ाई के खास चैनल देख सकेंगे। अब इन बच्चों को स्कूल जाने के लिए तपती धूप में मील दूर पैदल नहीं चलना पड़ेगा। स्कूल खुद चलकर बच्चों के पास उनके घर और माता-पिता के कार्यस्थल तक पहुँचेगा।
बिना बाहरी बिजली के 48 घंटे चलेंगे पंखे और लाइटें
इन बसों को इस तरह से तैयार किया गया है कि इन्हें बाहर से बिजली देने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। बस की छत पर एक दमदार सोलर प्लांट लगाया गया है। यह सोलर सिस्टम एक बार धूप से चार्ज होने पर बिना दोबारा चार्ज हुए भी 48 घंटे तक स्कूल की लाइट और पंखे चला सकता है।
रेगिस्तान और भारी गर्मी वाले इलाकों को ध्यान में रखकर बसों में फोल्ड होने वाली मेज और कुर्सियाँ लगाई गई हैं। साथ ही पीने के साफ पानी और हाथ धोने के लिए वॉश बेसिन का भी इंतजाम किया गया है।
पढ़ाई के साथ खेलकूद और सेहत का भी पूरा ध्यान
बच्चों का मन स्कूल में लगा रहे, इसके लिए बस के अंदर और बाहर मनोरंजन का पूरा इंतजाम किया गया है। बस में बच्चों के लिए एक छोटी सी लाइब्रेरी बनाई गई है। इसके साथ ही लूडो, सांप-सीढ़ी, झूले, स्लाइड और बास्केटबॉल जैसे खेल भी शामिल किए गए हैं।
बच्चों की सेहत की जाँच के लिए बस में वजन करने की मशीन और फर्स्ट एड बॉक्स (दवाइयों की किट) भी रखी गई है। आपात स्थिति से निपटने के लिए आग बुझाने वाला सिलेंडर और इमरजेंसी गेट भी लगाया गया है।
इन जिलों में भेजी गई हैं सभी 28 बसें
अधिकारियों ने बताया कि इन 28 बसों को उन जगहों पर तैनात किया गया है जहाँ नमक का काम सबसे ज्यादा होता है। इनमें से सबसे ज्यादा 20 बसें सुरेंद्रनगर जिले के पाटड़ी इलाके में भेजी गई हैं।
इसके अलावा 4 बसें पाटन जिले में और 2-2 बसें कच्छ व मोरबी जिले के इलाकों में भेजी गई हैं। सरकार का मुख्य मकसद यही है कि रेगिस्तानी और दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर को कम किया जा सके और शिक्षा को हर बच्चे तक पहुंचाया जा सके।

