उत्तर प्रदेश के अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी हेराफेरी के मामले में जाँच लगातार तेज हो रही है। जाँच एजेंसियों ने मामले से जुड़े कई पहलुओं को खंगालते हुए करीब 70 से 80 लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए बुलाया है। इनमें मंदिर प्रबंधन और मामले से जुड़े कुछ प्रमुख नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं।
जाँच में यह आशंका भी जताई जा रही है कि मामला केवल सीमित स्तर की गड़बड़ी नहीं बल्कि आर्थिक लेन-देन और कई स्तरों पर फैले नेटवर्क से जुड़ा हो सकता है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, जाँच के दौरान सामने आया कि कुछ संदिग्धों ने मोबाइल फोन से चैट और डिजिटल रिकॉर्ड हटाने की कोशिश की थी। अब इन मोबाइल फोन को फॉरेंसिक जाँच के लिए भेजा जाएगा ताकि डिलीट डेटा रिकवर किया जा सके। साथ ही कई बैंकों से खातों, लॉकरों और वित्तीय लेन-देन का विवरण भी माँगा गया है।
पुलिस ने ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय का बयान भी दर्ज किया है और जरूरत पड़ने पर अन्य पदाधिकारियों से पूछताछ की जा सकती है। जाँच में यह भी सामने आया कि कथित गड़बड़ी की जानकारी शुरुआती स्तर पर पहले से मौजूद थी और कुछ कार्रवाई औपचारिक शिकायत दर्ज होने से पहले शुरू हो गई थी।
राम मंदिर मामले में फैजाबाद बार का ऐलान, चंपत राय को अयोध्या छोड़ने की माँग
मामले ने अब कानूनी और सामाजिक स्तर पर भी असर दिखाना शुरू कर दिया है। फैजाबाद बार एसोसिएशन ने फैसला लिया है कि उसका कोई भी सदस्य इस मामले में गिरफ्तार आरोपितों की ओर से पैरवी नहीं करेगा। एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि फैसले का उल्लंघन करने वाले वकील पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है।
बैठक में कुछ वकीलों ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव को अयोध्या छोड़ने की माँग भी उठाई। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि तीन दिन के अंदर नहीं गए तो पूरी अयोध्या को जाम कर दिया जाएगा। फिलहाल गिरफ्तार आठ आरोपितों पर मंदिर के चढ़ावे में मिली नकदी और कीमती सामान की हेराफेरी को लेकर जाँच जारी है।

