6 दिनों में 9 प्रसूताओं की मौत, राजस्थान के 2 सरकारी अस्पताल में हड़कंप: जयपुर की एक्सपर्ट टीम वजह ढूँढने में जुटी, OT रिपोर्ट में मिला संक्रमण

राजस्थान के सरकारी अस्पतालों में प्रसूताओं की लगातार हो रही मौतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कोटा और बीकानेर के बाद अब भीलवाड़ा और बांसवाड़ा से सामने आए मामलों ने सरकार और स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है।

भीलवाड़ा के महात्मा गाँधी अस्पताल के मातृ एवं शिशु चिकित्सालय (MCH) में 6 दिनों के भीतर 5 प्रसूताओं की मौत हुई है, जबकि बांसवाड़ा के महात्मा गाँधी अस्पताल में 4 दिनों में एक नाबालिग समेत 4 प्रसूताओं ने दम तोड़ दिया। सभी मामलों की जाँच के लिए विशेषज्ञ टीम भेजी गई है और सरकार ने किसी भी तरह की लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है।

भीलवाड़ा में 6 दिन में 5 मौतें, परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

भीलवाड़ा के MCH अस्पताल में जिन पाँच महिलाओं की मौत हुई, उनकी सिजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेडिकल ICU में भर्ती कराया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। मृतकों के परिजनों ने इलाज में लापरवाही और कुछ मामलों में बिना पोस्टमॉर्टम शव सौंपने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।

अस्पताल अधीक्षक डॉ अरुण गौड़ ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि सभी मरीज पहले से गंभीर हालत में थीं और डॉक्टरों ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की। उनके अनुसार किसी की मौत हार्ट अटैक, किसी की थ्रंबो एम्बोलिज्म और कुछ मामलों में अत्यधिक रक्तस्राव (PPH) जैसी मेडिकल जटिलताओं के कारण हुई।

अस्पताल में रोज 30 से 40 सिजेरियन ऑपरेशन किए जाते हैं, जबकि केवल 8 सर्जिकल सेट उपलब्ध हैं। ऑपरेशन थिएटर की एक रिपोर्ट में संक्रमण की आशंका सामने आने के बाद संबंधित ओटी को बंद कर स्टरलाइजेशन और फ्यूमिगेशन कराया जा रहा है।

बांसवाड़ा में भी 4 मौतें, सरकार ने बनाई जाँच टीम

बांसवाड़ा के महात्मा गाँधी अस्पताल में 7 से 10 जुलाई के बीच चार प्रसूताओं की मौत हुई। प्रशासन के अनुसार इनमें से दो महिलाओं को बेहद गंभीर हालत में दूसरे अस्पतालों से रेफर किया गया था, जबकि दो मामलों में सिजेरियन ऑपरेशन हुआ था।

शुरुआती जाँच में गंभीर एनीमिया, हाई ब्लड प्रेशर और अन्य मेडिकल जटिलताओं की बात सामने आई है। ऑपरेशन थिएटर से सैंपल लेकर संक्रमण और दवाइयों के रिएक्शन की भी जाँच की जा रही है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम भीलवाड़ा और बांसवाड़ा भेजी है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि हर मौत की मेडिकल हिस्ट्री और इलाज की पूरी प्रक्रिया की जाँच होगी।

यदि किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों ने प्रदेश की मातृ स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी अस्पतालों की व्यवस्थाओं पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।