पेट्रोल में 20 फीसदी इथेनॉल मिलाने यानी E20 कार्यक्रम को लेकर सुप्रीम कोर्ट में कभी नहीं कहा है कि ‘यह केवल एक्सपेरिमेंट है’। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण एक स्थायी राष्ट्रीय नीति है। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने इसे कभी भी ‘चल रहा एक्सपेरिमेंट’ नहीं कहा है।
इस संबंध में मीडिया की कुछ भ्रामक रिपोर्टों को खारिज करते हुए सरकार ने साफ किया कि E20 पूरी तरह से लागू की जा चुकी एक बाध्यकारी नीति है, न कि कोई परीक्षण या ट्रायल। कई मीडिया रिपोर्ट में इसे गलत तरीके से चलाया गया है। सरकार ने साफ कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में उनका पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल की दलीलों को गलत तरीके से पेश किया गया।
दरअसल इथेनॉल आवंटन मामले में बीपीसीएल (BPCL) की विशेष अनुमति याचिका पर माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए वर्ष 2025-26 के इथेनॉल आपूर्ति वर्ष के आवंटन में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया।
The Attorney General's office has noticed certain false media reports published on 30-06-2026 on his submissions made before Hon'ble Supreme Court during arguments on the matter of Ethanol Blended Petrol (E20).
— Ministry of Law and Justice (@MLJ_GoI) July 1, 2026
For the complete factual position,
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न्यायमूर्ति एम.एम. सुंदरेश और न्यायमूर्ति शील नागू की अवकाशकालीन पीठ ने बीपीसीएल की याचिका पर नोटिस जारी किया और अगली सुनवाई तक इथेनॉल वितरण में कोई भी बदलाव करने पर रोक लगा दी।
मीडिया रिपोर्ट में गलत तरीके से प्रचारित किया गया
इस दौरान अटॉनी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट में जो दलीलें दी उसे कुछ मीडिया रिपोर्ट में तोड़-मरोड़ कर पेश किया गया है। रिपोर्टों में कहा गया है कि सरकार का 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ई20) कार्यक्रम ‘अभी भी चल रहा एक प्रयोग’ है और ‘इस नीति का असर अगले वर्ष तक और स्पष्ट हो जाएगा।’

अटॉर्नी जनरल के ऑफिस ने 30 जून 2026 को छपी इन दलीलों का खंडन किया है और कहा है कि ये रिपोर्ट पूरी तरह से गलत हैं और माननीय न्यायालय के समक्ष पेश की गई असल दलीलों से इनका कोई लेना-देना नहीं है।

क्या कहा अटॉर्नी जनरल ने
दरअसल सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटॉर्नी जनरल ने कहा कि इथेनॉल संयंत्रों और इसके इस्तेमाल से जुड़ी कई रिट याचिकाएँ अलग अलग हाईकोर्ट में लंबित हैं। इन्हें सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए ताकि सभी अनुबंध से जुड़े नियमों और उनके सवालों पर एक साथ विचार किया जा सके।
इससे विरोधाभाषी फैसलों की संभावना से भी बचा जा सकता है, साथ ही इस कदम से कानूनी विवाद के तेजी से खत्म होने की संभावना है ताकि इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल कार्यक्रम (जो एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है) के तहत पूरे वर्ष पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने हेतु तेल विपणन कंपनियों (ओएमसी) को होने वाली आपूर्ति पर कोई असर न पड़े।
अटॉर्नी जनरल की दलीलों पर विचार करते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने माना कि स्थानांतरण याचिकाएँ दायर की जानी चाहिए और यह भी माना कि वर्तमान इथेनॉल आपूर्ति वर्ष (2025-26) के लिए इथेनॉल के आवंटन की यथास्थिति कायम रखी जानी चाहिए।
अटॉर्नी जनरल ऑफिस ने साफ कहा है कि किसी भी स्तर पर यह दलील नहीं दी गई कि सरकार का इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) कार्यक्रम या ई20 ब्लेंडिंग प्रोग्राम एक ‘प्रयोग’ है।
उन्होंने सरकार का पक्ष रखते हुए साफ किया उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष ई20 कार्यक्रम को एक ‘प्रयोग’ नहीं बताया था।
उन्होंने मीडिया से अनुरोध किया है कि वे न्यायिक कार्यवाही की रिपोर्टिंग पूरी सटीकता के साथ करें, खासकर उन मामलों में जिनमें महत्वपूर्ण राष्ट्रीय नीतिगत पहल शामिल हों।

