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बलिदानियों के सम्मान को भी कॉन्ग्रेस ने बनाया प्रोपेगेंडा, मोदी सरकार को घेरने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर फैलाया झूठ: जानें- क्या है ‘एक साल तक बलिदान छिपाने’ का सच

कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को फैक्ट चेक करने की आदत ही नहीं है। हेडलाइन बटोरने और सरकार को घेरने की जल्दबाजी में कॉन्ग्रेस के नेता बुनियादी तथ्यों को भी देखना जरूरी नहीं समझते।

राजनीति में सुर्खियों में बने रहने के लिए कई बार बिना तथ्यों को जाँचे-परखे आरोप लगा दिए जाते हैं। ऐसा ही कुछ कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन खेड़ा ने किया है। पवन खेड़ा ने India Today की खबर को शेयर करते हुए मोदी सरकार पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के वीर बलिदानियों के नाम छुपाने का एक गंभीर आरोप लगाया। कल तक तमाम बड़े मीडिया चैनलों की हेडलाइन भी ये ही थी, कि पहली बार ‘सार्वजनिक किए 6 बलिदानियों के नाम’। लेकिन जब इस दावे की पड़ताल की गई, तो सच कुछ और ही निकला।

दरअसल, जिन बलिदानियों के नाम सरकार द्वारा छुपाने का दावा पवन खेड़ा कर रहे हैं, वे नाम पहले से ही देश के सामने थे। रक्षा मंत्रालय और भारतीय सेना ने उनकी शहादत के तुरंत बाद ही पूरे सम्मान के साथ इसकी जानकारी सार्वजनिक की थी। हाल ही में सरकार ने बस इन नामों को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) की आधिकारिक दीवार और वेबसाइट पर दर्ज कराया है, जिसे कॉन्ग्रेस नेता ने ‘नाम छुपाने’ का सियासी रंग दे दिया।

कॉन्ग्रेस नेता पवन खेड़ा ने क्या लगाया आरोप?

पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले 6 जांबाजों की सूची साझा की। इन नामों में सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र), लांस नायक दिनेश कुमार, एविएशन टेक्निशियन मूड मुरलीनायक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना पदक) शामिल थे।

इन नामों को पोस्ट करते हुए पवन खेड़ा ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने लिखा कि इन बहादुर बेटों ने पहलगाम हमले के बाद देश के सम्मान और हमारी बहनों के सिंदूर की रक्षा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनके नाम राष्ट्रीय चेतना में अंकित होने चाहिए थे। लेकिन, भाजपा सरकार ने पूरे एक साल तक देश से उनकी शहादत को छुपा कर रखा। उन्होंने आगे सरकार के राष्ट्रवाद पर सवाल उठाते हुए लिखा कि जो सरकार खुद को तिरंगे में लपेटती है, उसने हमारे नायकों को वह सम्मान और पहचान नहीं दी, जिसके वे हकदार थे।

फैक्ट चेक में क्या निकला सच?

जब इस दावे का फैक्ट चेक किया गया, तो पवन खेड़ा के आरोप पूरी तरह से निराधार और झूठे साबित हुए। भारतीय सेना, वायुसेना और रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड्स बताते हैं कि इन वीर जवानों के सर्वोच्च बलिदान को कभी छुपाया ही नहीं गया था। जब मई 2025 में पाकिस्तान और PoK में आतंकी ठिकानों को तबाह करने के लिए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया गया था, तभी सेना ने समय-समय पर इन जांबाजों की शहादत की जानकारी देश को दी थी। आइए सिलसिलेवार ढंग से देखते हैं कि सच क्या है।

सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना पदक): भारतीय वायुसेना (IAF) ने खुद 13 अगस्त 2025 को ट्वीट कर जानकारी दी थी कि तत्कालीन एयर चीफ मार्शल AP सिंह खुद राजस्थान के झुंझुनूं जिले में सार्जेंट सुरेंद्र कुमार के पैतृक गाँव गए थे। वहाँ उन्होंने बलिदानी की माता, पत्नी और बच्चों से मुलाकात कर सांत्वना दी थी। इसे छुपाना कैसे कहा जा सकता है?

सूबेदार मेजर पवन कुमार: भारतीय सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने 16 मई 2025 को ही आधिकारिक तौर पर ट्वीट कर सूबेदार मेजर पवन कुमार की वीरता और सर्वोच्च बलिदान को सलाम किया था।

हवलदार सुनील कुमार सिंह: सेना की व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने 7 जून 2025 को ट्वीट कर बताया था कि अस्पताल में इलाज के दौरान 6 जून 2025 को हवलदार सुनील कुमार सिंह वीरगति को प्राप्त हुए। सेना ने उनके परिवार के साथ एकजुटता व्यक्त की थी।

राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र): समाचार एजेंसी एएनआई (ANI) ने 11 मई 2025 को बाकायदा एक Video रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें जम्मू के त्रेवा गाँव में राइफलमैन सुनील कुमार के पार्थिव शरीर को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके निवास स्थान पर लाते हुए दिखाया गया था। राइफलमैन सुनील कुमार को वीर चक्र भी मिला है, शायद कॉन्ग्रेस ये बात भूल गई है।

अग्निवीर मूड मुरलीनायक: व्हाइट नाइट कॉर्प्स ने 20 मई 2025 को ट्वीट कर अग्निवीर मूड मुरलीनायक के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया था।

लांस नायक दिनेश कुमार: सेना ने 7 मई 2025 को ही ट्वीट कर जानकारी दे दी थी कि पुंछ सेक्टर में पाकिस्तानी गोलाबारी के दौरान लांस नायक दिनेश कुमार ने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी।

इन सभी आधिकारिक साक्ष्यों से यह पूरी तरह स्पष्ट है कि इन 6 वीरों के नाम और उनकी शहादत की गाथा एक साल पहले यानी साल 2025 में ही देश के सामने आ चुकी थी। सरकार ने केवल इस सैन्य नुकसान को आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की डिजिटल और वास्तविक दीवारों पर हमेशा के लिए अंकित किया है, जो कि एक तय प्रक्रिया का हिस्सा है।

बिना पैर-हाथ के आरोप लगाने की ‘कॉन्ग्रेसी’ आदत

इस पूरे मामले से एक बात फिर साफ हो गई है कि कॉन्ग्रेस पार्टी और उसके नेताओं को फैक्ट चेक करने की आदत ही नहीं है। हेडलाइन बटोरने और सरकार को घेरने की जल्दबाजी में कॉन्ग्रेस के नेता बुनियादी तथ्यों को भी देखना जरूरी नहीं समझते। देश की सुरक्षा और सैनिकों की शहादत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भी बिना सोचे-समझे राजनीति करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर पवन खेड़ा ने थोड़ा सा भी समय निकालकर भारतीय सेना या रक्षा मंत्रालय के सोशल मीडिया हैंडल खंगाले होते, तो शायद उन्हें खुद ही शर्मिंदगी उठानी पड़ती। लेकिन बिना देखे, बिना जाँचे आरोप मढ़ देना ही आज की राजनीति का नया टूल बन चुका है, जिसमें कॉन्ग्रेस के नेता पूरी तरह माहिर हो चुके हैं।

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