कलकत्ता हाई कोर्ट ने तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई को बिधाननगर कोर्ट में पेश होकर अपनी आवाज का नमूना (वॉयस सैंपल) देने का निर्देश दिया है। अगर वह कोर्ट के आदेश का पालन नहीं करते हैं, तो उन्हें गिरफ्तारी समेत पुलिस कार्रवाई से मिली राहत पर भी असर पड़ सकता है। कोर्ट ने जाँच में सहयोग ना करने के लिए अभिषेक पर सख्ती भी दिखाई।
शुक्रवार (10 जुलाई 2026) को जस्टिस सौगत भट्टाचार्य की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि अभिषेक बनर्जी को 15 जुलाई 2026 को संबंधित न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष उपस्थित होकर पश्चिम बंगाल CID को अपना वॉयस सैंपल देना होगा।
भट्टाचार्य ने यह भी चेतावनी दी कि यदि 15 जुलाई 2026 को दोपहर 2 बजे तक बिधाननगर कोर्ट में आवाज के नमूने देने के निर्देश का उल्लंघन किया जाता है, तो आर्थिक दंड लगाया जाएगा। कोर्ट ने कहा कि जाँच एजेंसी द्वारा वॉयस सैंपल लेने का फैसला पहले दिए गए आदेश के दायरे में आता है और जाँच में सहयोग करना अनिवार्य है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि उसे इस प्रक्रिया से जुड़े तकनीकी पहलुओं में हस्तक्षेप करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि जाँच में पूरा सहयोग देना होगा।अभिषेक बनर्जी ने वॉयस सैंपल लेने की अनुमति देने वाले निचली अदालत के आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।
हालाँकि सुनवाई के दौरान उन्होंने अपनी याचिका वापस ले ली। इस दौरान कोर्ट ने इस बात पर नाराजगी जताई कि मुख्य मामला लंबित होने के बावजूद उसी आपराधिक मामले से जुड़ी अलग याचिका दूसरी पीठ के समक्ष दायर की गई। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसा कदम जाँच की प्रक्रिया को धीमा करने का प्रयास प्रतीत होता है।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान अभिषेक बनर्जी के एक चुनावी भाषण से जुड़ा है। आरोप है कि उन्होंने चुनाव प्रचार के दौरान कहा था कि चुनाव परिणाम आने के बाद जश्न में डीजे इतने तेज बजेंगे कि लोगों के कान गूंजने लगेंगे। एक मतदाता ने इस बयान को डराने और भड़काऊ बताते हुए आपराधिक शिकायत दर्ज कराई थी।
इसी शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया गया था और CID जाँच कर रही है। सुनवाई के दौरान अभिषेक के वकील ने कोर्ट से पेशी के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने की माँग की।
इस पर हाई कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि 15 जुलाई को कोर्ट या जाँच एजेंसी के समक्ष पेशी के दौरान अभिषेक बनर्जी के साथ किसी तरह की बदसलूकी, अंडे फेंकने जैसी घटना या अन्य प्रकार का उत्पीड़न न होने दिया जाए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

