अमेरिका में जंगली आग से छाया जहरीला धुआँ, भड़के ट्रंप ने कनाडा को ठहराया जिम्मेदार: लापरवाही का आरोप लगाते हुई दी टैरिफ लगाने की धमकी

अमेरिका इस समय मौसम की दोहरी और भयावह मार झेल रहा है। देश के पूर्वी हिस्से में स्थित ग्रेट लेक्स से लेकर राजधानी वॉशिंगटन डीसी तक के 15 राज्यों में लगातार तीसरे दिन स्थिति बेहद गंभीर बनी हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वायु प्रदूषण के लिए सीधे तौर पर कनाडा को जिम्मेदार ठहराते हुए उस पर तीखा हमला बोला है।

डोनाल्ड ट्रंप ने कनाडा पर अपने जंगलों का सही प्रबंधन न करने का आरोप लगाया और कनाडाई आयात पर अतिरिक्त शुल्क (टैरिफ) लगाने की धमकी दी।

ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक पोस्ट में कनाडा सरकार पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने बयान जारी करते हुए कहा, “कनाडा अपने जंगलों का सही तरीके से प्रबंधन करने में पूरी तरह विफल रहा है और उसने वहाँ की आग के धुएँ को संयुक्त राज्य अमेरिका के हिस्सों में फैलने दिया। इसकी वजह से हमारे नागरिकों को गंदी, प्रदूषित और अस्वास्थ्यकर हवा में सांस लेने पर मजबूर होना पड़ रहा है।”

उन्होंने आगे लिखा, “अमेरिकी शहरों में बिगड़ती वायु गुणवत्ता के लिए पूरी तरह कनाडा को जिम्मेदार ठहराया जाएगा। प्रदूषण की इस आर्थिक लागत को कनाडाई आयात पर मौजूदा अमेरिकी टैरिफ में जोड़ दिया जाएगा। कनाडा ने जंगलों की सफाई और सूखी झाड़ियों को हटाने जैसे बुनियादी कदम नहीं उठाए, जबकि उसे पता था कि इससे हर साल बड़े पैमाने पर जंगलों में आग लगेगी। यह पूरी तरह से ‘जानबूझकर की गई लापरवाही’ है, जिससे अमेरिका को हर साल अरबों डॉलर का नुकसान हो रहा है। यह स्थिति पूरी तरह अस्वीकार्य है और मैं इस मुद्दे पर कनाडा के प्रधानमंत्री से सीधे बात करूँगा।”

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस विनाशकारी स्थिति के पीछे मुख्य वजह जलवायु परिवर्तन है, जिसने जंगलों की आग को और अधिक अनियंत्रित और खतरनाक बना दिया है।

बता दें कि कनाडा के जंगलों से उठे भयानक धुएँ ने अमेरिका के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है, जिससे लाखों नागरिकों के सामने गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन ने लोगों को घरों के भीतर ही रहने की सख्त सलाह दी है। शुक्रवार (17 जुलाई 2026) को अकेले 68 जगहों पर आग के नए मामले दर्ज किए गए।

जहाँ एक तरफ पूर्वी और पश्चिमी अमेरिका आग और धुएँ की लपटों से जूझ रहा है, वहीं देश का दक्षिणी हिस्सा भीषण बाढ़ की चपेट में है। इस आपदा से निपटने के लिए 17,400 कर्मचारी, 140 हेलीकॉप्टर और सेना के चार सी-130 एयर टैंकर तैनात किए गए हैं। इस साल अब तक करीब 37 करोड़ एकड़ क्षेत्र आग से प्रभावित हो चुका है।