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मुलायम परिवार की आँखों में खटक रहा राम मंदिर, ससुर ने कारसेवकों का कराया नरसंहार-पति ने चंदाचोरी पर फैलाई नफरत: अब डिंपल यादव बोली- राम मंदिर में बुलडोजर क्यों नहीं चला?

इतिहास गवाह है कि मुलायम सिंह यादव के समय में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई गई थीं। इसके बाद अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चंदे को लेकर बयानबाजी की थी। अब डिंपल यादव के इस बयान के बाद लोग पूछ रहे हैं कि क्या डिंपल भी राम मंदिर पर बुलडोजर चलवाकर वहाँ पुराना बाबरी ढांचा वापस देखना चाहती हैं?

समाजवादी पार्टी की सांसद डिंपल यादव इन दिनों दिल्ली के जंतर-मंतर पर शिक्षा सुधार और नीट (NEET) पेपर लीक के मुद्दे को लेकर अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक के समर्थन में उतरी हुई हैं। जंतर-मंतर पहुँचकर डिंपल यादव ने वांगचुक का समर्थन तो किया, लेकिन इस दौरान मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले को लेकर उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तीखा हमला बोला। डिंपल यादव ने राम मंदिर और बुलडोजर कार्रवाई को लेकर एक ऐसा विवादित बयान दे दिया है, जिसने दिल्ली से लेकर लखनऊ तक की सियासत में भूचाल ला दिया है।

राम मंदिर पर डिंपल का ‘बुलडोजर’ राग और पुराना इतिहास

डिंपल यादव ने भाजपा सरकार को घेरते हुए कहा कि देश में इस समय ‘बुलडोजर सरकार’ चल रही है, जो छात्रों के भविष्य पर बुलडोजर चला रही है। उन्होंने मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी मामले का जिक्र करते हुए सवाल उठाया। डिंपल ने कहा, “जब राम मंदिर में इतनी बड़ी चोरी हो गई तो वहाँ पर बुलडोजर थक गया है। तो आखिर बुलडोजर क्यों थम गया, सवाल इस बात का है।”

इस बयान के बाद अब डिंपल यादव खुद चौतरफा घिर गई हैं। आलोचक और राजनीतिक विश्लेषक सवाल उठा रहे हैं कि क्या एक कर्मचारी पर लगे कथित चोरी के आरोप के आधार पर पवित्र राम मंदिर की तुलना किसी अवैध निर्माण से करना जरा भी उचित है? इतिहास गवाह है कि मुलायम सिंह यादव के समय में अयोध्या में कारसेवकों पर गोलियाँ चलवाई गई थीं, जिसे लोग नरसंहार तक कहते हैं।

इसके बाद अखिलेश यादव ने राम मंदिर के चंदे को लेकर बयानबाजी की थी। अब डिंपल यादव के इस बयान के बाद लोग पूछ रहे हैं कि क्या डिंपल भी राम मंदिर पर बुलडोजर चलवाकर वहाँ पुराना बाबरी ढांचा वापस देखना चाहती हैं? पूरा यादव परिवार ही राम विद्रोही बनकर सामने आ रहा है।

अखिलेश का पुराना बयान और पूरा परिवार घेरे में

अखिलेश यादव ने भी पहले राम मंदिर के संदर्भ में एक बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि हमें सांचा नहीं, बल्कि ‘ढांचा बदलना’ होगा। उनके इस पुराने बयान को डिंपल यादव के ताजा बयान से जोड़कर देखा जा रहा है। देश जानता है कि पूरा मुलायम परिवार शुरू से ही राम विरोधी रहा है और डिंपल का यह बयान उसी सोच को आगे बढ़ाता है। अब जंतर-मंतर के बहाने इनके अंदर की कड़वाहट भी बाहर आ रही है। मुद्दा पेपर लीक मामले का है, लेकिन निशाना राम मंदिर पर आकर रूक जाता है।

अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर का निर्माण होने के बाद से ही यह मंदिर मुलायम परिवार की आँखों में और ज्यादा खटकने लगा है। राम मंदिर में सुरक्षा और व्यवस्था से जुड़े एक कर्मचारी पर चोरी का आरोप क्या लगा, डिंपल यादव ने सीधे पूरे मंदिर परिसर पर बुलडोजर चलाने की माँग जैसी भाषा का इस्तेमाल कर दिया। जनता के बीच अब यह सवाल तेजी से गूँज रहा है कि क्या एक कथित चोरी के बहाने पूरे राम मंदिर को निशाना बनाना और वहाँ बुलडोजर की बात करना तुष्टिकरण की राजनीति का हिस्सा नहीं है?

सपा सांसदों का जमावड़ा

इस पूरे सियासी घमासान की शुरुआत सोनम वांगचुक के धरने से जुड़ी हुई है। सोनम वांगचुक शिक्षा में बड़े सुधार, नीट पेपर लीक मामले में सख्त एक्शन और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की माँग को लेकर पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर कड़े धरने पर बैठे हैं। वे ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के बैनर तले यह बड़ा आंदोलन चला रहे हैं। इतने दिनों से लगातार अनशन पर रहने के कारण वांगचुक की तबीयत काफी बिगड़ चुकी है और शनिवार (18 जुलाई) सुबह ही अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

सोनम वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य के बीच समाजवादी पार्टी के सांसदों का एक बड़ा दल लगातार जंतर-मंतर पहुँच रहा है। इससे पहले सपा सांसद प्रिया सरोज भी वांगचुक के अनशन स्थल पर पहुँची थीं और उन्होंने संसद से लेकर सड़क तक उनके मुद्दों को उठाने का वादा किया था। खुद सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी सोनम वांगचुक से अपना अनशन समाप्त करने की अपील की थी। लेकिन अब इस आंदोलन के मंच का इस्तेमाल राजनीतिक बयानों के लिए होने लगा है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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