होटल की लिफ्ट में 14 मिनट तक फँसे रहे शशि थरूर, फायर ब्रिगेड ने हाइड्रोलिक मशीन से निकाला: केरल में अपने ही क्षेत्र में दुर्गति का शिकार हुए कॉन्ग्रेस सांसद

केरल की राजधानी और कॉन्ग्रेस सांसद शशि थरूर के अपने ही लोकसभा क्षेत्र तिरुवनंतपुरम से शुक्रवार (17 जुलाई) शाम को एक बेहद चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यहाँ एक स्थानीय होटल में आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होने पहुँचे कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर एक लिफ्ट में करीब 14 मिनट तक फँसे रहे।

लिफ्ट में अचानक आई तकनीकी खराबी के कारण वहाँ हड़कंप मच गया और मौजूद लोगों की साँसें अटक गईं। राहत की बात यह रही कि सूचना मिलते ही मौके पर पहुँचे दमकल विभाग (फायर ब्रिगेड) के बचाव दल ने सूझबूझ दिखाते हुए सांसद और उनके साथ मौजूद अन्य सभी लोगों को बेहद सुरक्षित तरीके से बाहर निकाल लिया। लिफ्ट से बाहर आते ही थरूर के चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, बल्कि उन्होंने मुस्कुराते हुए दमकल कर्मियों का आभार जताया और उन्हें चाय पीने का न्योता भी दे दिया।

अपने ही क्षेत्र में दुर्गति और वामपंथी राज में खराब इंफ्रास्ट्रक्चर का शिकार

केरल में लंबे समय तक वामपंथियों का राज रहा है और यहाँ कॉन्ग्रेस का भी बड़ा प्रभाव है। लेकिन इस घटना ने राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर की बदहाल और खराब हालत को एक बार फिर उजागर कर दिया है। कॉन्ग्रेस के इतने बड़े नेता और सांसद शशि थरूर आज अपने ही लोकसभा क्षेत्र में बुनियादी व्यवस्थाओं की दुर्गति का शिकार हो गए। एक नामी होटल में इस तरह तकनीकी खराबी होना यह दिखाता है कि राज्य में रखरखाव और सुरक्षा मानकों की कितनी अनदेखी की जा रही है।

अब इस घटना को लेकर केरल की कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे पर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि जहाँ सालों से वामपंथियों और कॉन्ग्रेस का दबदबा रहा, वहाँ VIP इलाकों में भी ऐसी लापरवाही आम बात हो गई है। जब खुद सांसद ही सुरक्षित नहीं हैं और उन्हें तकनीकी खराबी के कारण लिफ्ट में बंद रहना पड़ता है, तो आम जनता के साथ क्या होता होगा। इस घटना ने शहर की लचर व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है।

लोहे की रॉड से कोशिश नाकाम और फायर ब्रिगेड का एक्शन

जानकारी के मुताबिक, शुक्रवार (17 जुलाई) की शाम करीब 7:37 बजे दमकल विभाग को आधिकारिक तौर पर सूचना दी गई कि सांसद होटल की लिफ्ट में फँस गए हैं। इसके तुरंत बाद बचाव कर्मियों की एक विशेष टीम तेजी से घटनास्थल के लिए रवाना हुई। स्थानीय TV चैनलों पर दिखाए गए दृश्यों में साफ देखा गया कि शुरुआत में होटल के स्टाफ और कुछ अन्य लोगों ने लोहे की रॉड (छड़) की मदद से लिफ्ट का दरवाजा जबरन खोलने की कोशिश की थी। लेकिन काफी मशक्कत के बाद भी उन्हें कोई कामयाबी नहीं मिली।

इसके बाद मौके पर पहुँचे दमकल कर्मियों ने तुरंत मोर्चा संभाला। उन्होंने आधुनिक ‘हाइड्रोलिक स्प्रेडर’ मशीन का इस्तेमाल किया और चंद मिनटों में लिफ्ट के भारी दरवाजों को बीच से फैलाकर खोल दिया। शाम करीब 7:51 बजे, यानी लगभग 14 मिनट की कड़ी मशक्कत के बाद शशि थरूर और अन्य लोगों को सकुशल बाहर निकाला गया। जब दरवाजा खुला तो देखा गया कि लिफ्ट अपनी तय मंजिल से थोड़ा नीचे ही अटक गई थी और पूरी तरह ऊपर नहीं पहुँच पाई थी।