प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 जुलाई 2026) को मन की बात के 136वें एपिसोड में मणिपुर के युवा खगोल वैज्ञानिक (Astrophysicist) डॉ. रोनाल्डो लैशराम की उपलब्धि को सराहा। पीएम मोदी ने कहा कि विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में दुनिया भर में अपनी पहचान बना रहे डॉ. लैशराम ने अंतरिक्ष में खोजी गई युवा आकाशगंगाओं (young galaxies) के एक विशाल समूह का नाम मणिपुर की प्रसिद्ध लोकतक झील के नाम पर ‘लोकतक प्रोटोक्लस्टर’ रखकर अपनी मातृभूमि को वैश्विक पहचान दिलाई है।
पीएम मोदी ने कहा कि यह उपलब्धि हर भारतीय के लिए गर्व का विषय है और युवाओं को अपनी जड़ों से जुड़े रहते हुए नई ऊँचाइयों तक पहुँचने की प्रेरणा देती है।
नाम उनका Ronaldo है लेकिन काम से वो एक Astrophysicist हैं | वे जापान में काम करते हैं और young galaxies के एक विशाल समूह की खोज करने वाली टीम का हिस्सा रहे हैं | – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी @narendramodi @PMOIndia @MIB_India#MannKiBaat #MKB #MKBOnDD… pic.twitter.com/bS9fjjoz9m
— Doordarshan National दूरदर्शन नेशनल (@DDNational) July 26, 2026
कौन हैं डॉ. रोनाल्डो लैशराम?
डॉ. रोनाल्डो लैशराम मणिपुर के थोउबल जिले के खंगाबोक गाँव के रहने वाले हैं। वह वर्तमान में जापान के नेशनल एस्टोनॉमिकल ऑब्जर्वेटरी ऑफ जापान (NAOJ) में पोस्ट डॉक्टोरल शोधकर्ता के रूप में कार्यरत है। उन्होंने जापान के तोहोकू विश्वविद्यालय से खगोल विज्ञान में मास्टर्स और पीएचडी की पढ़ाई पूरी की। उनका शोध प्रारंभिक ब्रह्मांड में आकाशगंगाओं के निर्माण और उनके विकास पर केंद्रित है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक शोध पत्रों का लेखन और सह लेखन भी किया है।
उन्होंने जिस खोज में अहम भूमिका निभाई, वह लगभग 12.6 अरब वर्ष पुराने एक विशाल प्रोटोक्लस्टर की खोज है। प्रोटोक्लस्टर को वैज्ञानिक भविष्य में बनने वाले विशाल गैलेक्सी क्लस्टर का शुरुआती रूप मानते हैं। इसे वैज्ञानिकों की भाषा में ‘सिटी ऑफ गैलेक्सीज’ यानी आकाशगंगाओं का शहर भी कहा जाता है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के प्रभाव से यहाँ मौजूद युवा आकाशगंगाएँ धीरे-धीरे एक विशाल समूह का रूप लेती हैं।
यह संरचना उस समय की है जब ब्रह्मांड की आयु केवल करीब 1.2 अरब वर्ष थी। यानी यह शुरुआती ब्रह्मांड की सबसे प्राचीन संरचनाओं में से एक मानी जा रही है।
डॉ. लैशराम ने इस नई संरचना का नाम ‘लोकतक प्रोटोक्लस्टर’ इसलिए रखा क्योंकि इसकी बनावट उन्हें मणिपुर की प्रसिद्ध लोकतक झील की याद दिलाती है। पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील लोकतक अपनी तैरती हुई वनस्पतियों, जिन्हें फूमडी (Phumdis)कहा जाता है, के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है।
ये फूमडी अलग-अलग दिखाई देती हैं, लेकिन एक ही जल क्षेत्र से जुड़ी रहती हैं। इसी तरह इस प्रोटोक्लस्टर में भी चार अलग-अलग आकाशगंगा समूह एक विशाल संरचना के रूप में जुड़े हुए हैं। डॉ. लैशराम का कहना है कि लोकतक मणिपुर की पहचान का अभिन्न हिस्सा है और इस नाम के माध्यम से वह अपने राज्य की संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को ब्रह्मांड के इतिहास से जोड़ना चाहते थे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मन की बात’ में डॉ. लैशराम की उपलब्धि का जिक्र करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक वैज्ञानिक खोज नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी और संस्कृति के प्रति सम्मान का भी प्रतीक है। उन्होंने कहा कि आज मणिपुर की लोकतक झील केवल भारत के नक्शे तक सीमित नहीं रही, बल्कि अब उसका नाम ब्रह्मांड की विशाल संरचनाओं में भी दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपनी परंपराओं और जड़ों से जुड़े रहते हुए विज्ञान, नवाचार और शोध के क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित करें।

