हरियाणा में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान का पहला चरण पूरा होने के बाद निर्वाचन विभाग ने राज्य की ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 2.06 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं में से करीब 1.72 करोड़ मतदाताओं के नाम शामिल किए गए हैं, जबकि 33.84 लाख नाम अस्थायी रूप से सूची से बाहर कर दिए गए हैं।
निर्वाचन आयोग का कहना है कि यह अंतिम सूची नहीं है और जिन पात्र नागरिकों का नाम किसी कारणवश शामिल नहीं हो पाया है, उन्हें आपत्ति दर्ज कराने का पूरा अवसर दिया जाएगा।
क्यों हटाए गए लाखों मतदाताओं के नाम?
निर्वाचन विभाग के अनुसार, सूची से हटाए गए नामों के पीछे कई कारण सामने आए हैं। बड़ी संख्या में ऐसे मतदाता मिले जो अपने दर्ज पते पर नहीं मिले, जबकि लाखों लोग स्थायी रूप से दूसरे स्थानों पर जा चुके थे। इसके अलावा कई मतदाताओं की मृत्यु हो चुकी थी और कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति का नाम अलग-अलग स्थानों की मतदाता सूची में दर्ज पाया गया।
अधिकारियों का कहना है कि शहरी क्षेत्रों, विशेषकर गुरुग्राम, फरीदाबाद और पंचकूला जैसे जिलों में सबसे अधिक नाम हटाए गए हैं। ड्राफ्ट सूची गणना प्रक्रिया के दौरान प्राप्त प्रपत्रों और फील्ड सत्यापन के आधार पर तैयार की गई है।
31 अगस्त तक मिलेगा सुधार और नाम जुड़वाने का मौका
आयोग ने स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति हमेशा के लिए मतदाता सूची से बाहर हो गया है। 31 जुलाई से 30 अगस्त तक दावा और आपत्ति की प्रक्रिया चलेगी, जिसके दौरान नए मतदाता अपना नाम जोड़ने, गलत जानकारी में सुधार कराने, पता बदलवाने या अन्य आवश्यक संशोधन के लिए आवेदन कर सकते हैं।
इसके लिए अलग-अलग निर्धारित फॉर्म उपलब्ध हैं, जिन्हें ऑनलाइन या संबंधित निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) अथवा बूथ स्तर अधिकारी (BLO) के माध्यम से जमा किया जा सकता है। यदि किसी मतदाता का नाम हटाने का प्रस्ताव होगा तो संबंधित व्यक्ति को नोटिस देकर पक्ष रखने का अवसर भी दिया जाएगा।
विसंगतियों की होगी जाँच, अंतिम सूची बाद में होगी जारी
SIR के दौरान लाखों ऐसे मामलों की भी पहचान हुई है, जिनमें मतदाता विवरण, पारिवारिक जानकारी या आयु संबंधी रिकॉर्ड में विसंगतियां मिली हैं। ऐसे मामलों की जाँच बूथ स्तर अधिकारी करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों को नोटिस भेजा जाएगा।
निर्वाचन आयोग ने कहा है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के साथ पूरी की जाएगी ताकि कोई भी पात्र मतदाता अपने मतदान के अधिकार से वंचित न रहे। यदि कोई व्यक्ति ERO के फैसले से संतुष्ट नहीं होता है तो उसे पहले जिला मजिस्ट्रेट और उसके बाद मुख्य निर्वाचन अधिकारी के समक्ष अपील करने का अधिकार भी रहेगा।
दावा और आपत्तियों के निस्तारण के बाद अंतिम मतदाता सूची निर्धारित समय पर जारी की जाएगी, जिसके आधार पर आगामी चुनावों की तैयारी आगे बढ़ेगी।

