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पत्रकार को उठाने के बाद बिना सर्च वारंट OTV ऑफिस पहुँची ओडिशा पुलिस कहा- RTI नहीं, अश्लील Video का है मामला

पुलिस की एक टीम को कल रात से ही OTV के परिसर के सामने तैनात कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि पुलिस सर्च ऑपरेशन के लिए वहाँ पहुँची थी, लेकिन जब उनसे इसे लेकर सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि उनके पास कोई सर्च वारंट नहीं है।

ओडिशा टीवी (OTV) के पत्रकार रमेश रथ को हिरासत में लेने के बाद ओडिशा टीवी के परिसर को पुलिस द्वारा घेरे जाने की खबर आज (अक्टूबर 16, 2020) सामने आई है। यह घटना OTV पर पब्लिश हुई एक रिपोर्ट के बाद की है जो एक RTI पर आधारित थी। इस रिपोर्ट में सीएम नवीन पटनायक द्वारा किए गए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों के हवाई सर्वेक्षण पर सवाल उठाया गया था।

खबरों के मुताबिक, पुलिस की एक टीम को कल रात से ही OTV के परिसर के सामने तैनात कर दिया गया है। कहा जा रहा है कि पुलिस सर्च ऑपरेशन के लिए वहाँ पहुँची थी, लेकिन जब उनसे इसे लेकर सवाल किए गए तो उन्होंने कहा कि उनके पास कोई सर्च वारंट नहीं है।

अधिकारियों ने पुलिस से वारंट के सबंध में जब जानना चाहा तो क्योंझर पुलिस थाने (Keonjhar police station) के इंस्पेक्टर ने जवाब दिया कि उन्हें जाँच के लिए बिना वारंट, सर्च करने और परिसर में घुसने की अनुमति है। पुलिस ने यह भी कहा कि वह परिसर को तभी छोड़ेंगे जब वह अपनी खोजबीन कर लेगें।

रिपब्लिक टीवी से बात करते हुए ओटीवी के न्यूज एडिटर आर मिश्रा ने कहा, “यह पहली बार नहीं जब ओटीवी को टारगेट किया गया हो। रमेश रथ ही वह पत्रकार थे जिन्होंने सीएम पटनाक के एरियल सर्वे के ऊपर आरटीआई रिस्पॉन्स की न्यूज ब्रेक की थी। इसी के बाद जब अगले दिन वह कार्यालय आने लगे तो पुलिस ने उन्हें वैन में बैठा लिया और उनका मोबाइल सीज करके उन्हें पुलिस थाने ले गए। किसी को इस बारे में नहीं बताया गया कि उन्हें क्यों पकड़ा गया। उन्होंने पत्रकार के ख़िलाफ़ एफआईआर की है। हमें हमारे एंकर से इस संबंध में पता चला, फिर हमने पुलिस आयुक्त से इसकी पुष्टि की।” उन्होंने कहा कि ओटीवी को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा रहा है।

अश्लील क्लिप मामला

क्योंझर पुलिस ने इस मामले में बताया कि साल 2019 में लोकसभा चुनावों के समय सामने आई एक अश्लील क्लिप के कारण पत्रकार को पकड़ा गया है न कि ओटीवी की उस रिपोर्ट के कारण जिसमें सीएम के एरियल सर्वे के मद्देनजर सवाल पूछे गए। पुलिस का कहना है कि रथ का नाम उनकी पड़ताल में सामने आया और उन पर आरोप है कि उन्होंने ही वीडियो की डिटेल्स मुहैया करवाई।

पुलिस एक महिला सांसद के अश्लील वीडियो क्लिप के मामले में OTV कार्यालय की तलाशी लेना चाहती थी, जो 2019 लोकसभा चुनाव के दौरान प्रसारित किया गया था। साल 2019 के मामले पर बात करते हुए आर मिश्रा ने कहा यह मामला एक महिला बीजेडी नेता की अश्लील वीडियो से संबंधित है। इसमें दो ओटीवी पत्रकार और कुछ भाजपा नेता शामिल थे, और मीडिया हाउस ने केवल पड़ताल में साथ दिया था। अब क्योंझर पुलिस ओटीवी के परिसर के बाहर आकर रह रही है कि वह बिना वारंट के परिसर की छानबीन करेंगे।

आरटीआई क्या कहती है?

गौरतलब है कि 14 अक्टूबर को ओटीवी ने सीएम पटनायक से एक आरटीआई के जवाब पर आधारित कुछ सवाल किए थे। मीडिया हाउस ने दावा किया था कि ऑपरेशन में इस्तेमाल हुए हेलीकॉप्टर के आधिकारिक आँकड़े इस बात की पुष्टि नहीं करते कि सीएम ने हवाई सर्वे करवाया।

बता दें कि सीएम पटनायक ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 31 अगस्त को हवाई सर्वेक्षण कराया था और प्रभावित लोगों को आर्थिक मदद मुहैया कराने की बात कही थी। हालाँकि ओटीवी द्वारा एक्सेस की गई आरटीआई कहती है कि केवल ओएसएस एयर मैनेजमेंट का एक ही हेलीकॉप्टर भुवनेश्वर से उड़ा और वो भी केवल 19 मिनट के लिए। उन्होंने यह भी कहा कि उस दिन कोई वीवीआईपी मूवमेंट नहीं हुआ। इन्हीं बिंदुओं के आधार पर मीडिया चैनल ने सीएम के हवाई सर्वे पर प्रश्न उठाए थे।

OTV रिपोर्ट पर AAI का क्या कहना है?

ओटीवी के दावों को एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने खारिज कर दिया है और कहा है कि सीएम द्वारा उस दिन सर्वे करवाया गया था। एएआई ने ओटीवी के दावों के विपरीत कहा कि जो समय 19 मिनट का बताया जा रहा है वो वास्तविक उड़ान का समय था, और इसमें वार्म-अप समय, स्टार्टअप समय आदि नहीं शामिल हैं। एएआई की ओर से यह भी बताया गया कि एसओपी के अनुसार वीवीआईपी फ्लाइट का मतलब राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और विदेशी राज्य/ सरकार के प्रमुख से है। मुख्यमंत्री को वीवीआईपी में नहीं जोड़ा जाता, इसलिए नवीन पटनायक द्वारा किया गया सर्वे वीवीआईपी ट्रैवल में नहीं आता।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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