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‘मध्य प्रदेश में लोकतंत्र की हत्या’ – कमलनाथ सरकार में अप्रत्यक्ष तरीके से होगा मेयर का चुनाव

"कॉन्ग्रेस अप्रत्यक्ष तौर पर इसलिए चुनाव कराना चाहती है, क्योंकि वह जानती है कि अगर जनता के द्वारा चुनाव किया जाएगा, तो भाजपा ही जीतेगी।"

मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार ने बुधवार (सितंबर 25, 2019) को कैबिनेट की बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव को मंजूरी दे दी है। एक्ट में बदलाव के बाद अब राज्य में मेयर का चुनाव सीधे तौर पर यानी प्रत्यक्ष प्रणाली से नहीं होगा, बल्कि चुनाव में जीत कर आए पार्षद ही अपने बीच से मेयर और नगर निगम के अध्यक्ष का चुनाव करेंगे। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने इसकी जानकारी दी।

बता दें कि अब तक जनता सीधे मेयर को चुनती थी, लेकिन अब इस फैसले के बाद मेयर और नगर निगम अध्यक्ष का चुनाव पार्षदों के मतों पर होगा। यानी जिस राजनीतिक दल के पार्षद ज्यादा होंगे, उनका ही मेयर चुना जाएगा। सरकार के नगरीय निकाय एक्ट में बदलाव के फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है।

राज्य के पूर्व सीएम शिवराज सिंह ने इसे लोकतंत्र की हत्या बताते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस अप्रत्यक्ष तौर पर इसलिए चुनाव कराना चाहती है, क्योंकि वह जानती है कि अगर जनता के द्वारा चुनाव किया जाएगा, तो भाजपा ही जीतेगी। उन्होंंने कॉन्ग्रेस के इस फैसले को पराजय के भय से लिया गया फैसला बताया और कहा कि महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्ष को सीधे पार्षदों द्वारा चुनने का जो प्रस्ताव कॉन्ग्रेस लाई है, इससे जोड़-तोड़ और खरीद-फरोख्त के उसके कुत्सित प्रयास को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेस खरीद-फरोख्त और जोड़-तोड़ करके चुनाव जीतना चाहती है। शिवराज सिंह ने महापौर, नगर पालिका अध्यक्ष और नगर पंचायत के अध्यक्ष को भी जनता द्वारा चुने जाने (जैसा पहले से होता आया है) की माँग की है।

पार्टी की नगरीय निकाय समिति के प्रमुख पूर्व महापौर कृष्णमुरारी मोघे ने कहा कि भाजपा, कमलनाथ सरकार के इस फैसले का राजनीतिक रूप से विरोध करेगी। दो-तीन दिन में पार्टी इस बारे में विचार के लिए बैठक बुला रही है, जिसमें आगे की रणनीति बनाई जाएगी। भाजपा का कहना है कि कॉन्ग्रेस को अहसास था कि वो चुनाव में हार जाएगी, इसलिए उन्होंने प्रक्रिया ही बदल दी।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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