Homeदेश-समाजहिज़्बुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर में शाह फ़ैसल को समर्थन न देने की अपील

हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के पोस्टर में शाह फ़ैसल को समर्थन न देने की अपील

शाह फ़ैसल ने 2009 की सिविल सेवा सर्विस परीक्षा में भारत में पहला रैंक हासिल किया था और 9 जनवरी 2019 को IAS के पद से इस्तीफ़ा दे दिया था।

आईएएस की नौकरी छोड़कर राजनीति में आने का सपना देखने वाले शाह फ़ैसल जल्द-कश्मीर में अपनी नई पार्टी की लॉन्चिंग करने वाले हैं। इसी बीच कुख़्यात आतंकी संगठन हिज़्बुल मुजाहिद्दीन का एक पोस्टर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। पोस्टर में लोगों से कहा गया है कि वह फ़ैसल का समर्थन नहीं करें। हिज़्बुल मुजाहिद्दीन से जुड़े संगठन का कहना है कि फ़ैसल के आने से राजनीति में उसका मूवमेंट कमज़ोर पड़ेगा। हालाँकि, पुलिस ने अभी तक इस पोस्टर की पुष्टि नहीं की है।  

पोस्टर में कहा गया है, ”भारत ने चुनाव को क़ामयाब बनाने के लिए बहुत ही तेज़ चाल चली है और उन्होंने शाह फ़ैसले को चारा बना लिया है। हम पूरी कौम से अपील करते हैं कि चुनाव में वोट हरगिज़ नहीं डालें, क्योंकि ये भारत की चाल है। जब शाह फ़ैसल को वोट पड़ेंगे तो ये भारत बोलेगा कि पूरा कश्मीर हमारे साथ है।”

9 जनवरी को शाह फ़ैसल ने दिया था पद से इस्तीफ़ा

बता दें कि बीते 9 जनवरी को शाह फ़ैसल ने IAS के पद से इस्तीफ़ा दिया था और राजनीतिक पार्टी लॉन्च करने के लिए लोगों से सुझाव माँगे थे। फ़ैसल ने कहा था, “मेरे पास आइडिया है कि मुझे क्या करना चाहिए, लेकिन मैं अंतिम निर्णय लेने से पहले लोगों के विचार जानना चाहता हूँ।” बता दें कि यह वही फ़ैसल हैं जिन्होंने 2009 की सिविल सेवा सर्विस परीक्षा में भारत में पहला रैंक हासिल किया था।

Join OpIndia's official WhatsApp channel

  सहयोग करें  

'द वायर' जैसे राष्ट्रवादी विचारधारा के विरोधी वेबसाइट्स को कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

ऑपइंडिया स्टाफ़
ऑपइंडिया स्टाफ़http://www.opindia.in
कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

विवादों में ‘कॉकरोचों’ का 6 जून का प्रदर्शन, दिपके ने माना- ‘नहीं ली प्रोटेस्ट की परमिशन’: समझें- SC का फैसला, 7 दिन वाला नियम...

CJP के प्रस्तावित प्रदर्शन के बहाने समझिए जंतर-मंतर पर धरना देने की पूरी प्रक्रिया, दिल्ली पुलिस के नियम और सुप्रीम कोर्ट का रुख।

‘पहले मंदिर में नमाज पढ़ेंगे, फिर कहेंगे मस्जिद थी’: बुलंदशहर से भोजशाला तक, हिंदू पवित्र स्थलों पर दावों का कट्टरपंथियों का पैटर्न और लिबरल...

हिंदुओं के पवित्र स्थानों पर नमाज अदा करना भूल नहीं, सोची-समझी साजिश है। यदि कट्टरपंथियों का मन इतना ही साफ होता तो मंदिरों पर कब्जा नहीं करते।
- विज्ञापन -