Wednesday, December 2, 2020
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अंकिता जैन

बनस्थली विद्यापीठ से एम्.टेक कंप्यूटर साइंस. स्पेशलाइजेशन आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस। विप्रो गुडगाँव में एप्लीकेशन डेवलपर, सीडेक-पुणे में रिसर्च एसोसिएट एवं बंसल इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी भोपाल में बतौर असिस्टंट प्रोफेसर काम कर चुकी हैं। 2012 में रिलीज़ हुए भारत के सबसे बड़े फ़्लैश मोब गीत “आय लव यू मुंबई… मुंबई 143” के बोल लिखे. इस गीत को लिम्का बुक ऑफ़ नेशनल रिकॉर्ड में भी स्थान मिला। रेडियो-ऍफ़एम् के दो प्रसिद्ध शो “यादों का इडियट बॉक्स विथ नीलेश मिश्रा” एवं “यूपी की कहानियाँ” में दो दर्जन कहानियाँ लिखीं। मध्यप्रदेश बायो-डाइवर्सिटी बोर्ड द्वारा बनायी “धान” पर आधारित डाक्यूमेंट्री की स्क्रिप्ट राइटर। अहा ज़िन्दगी, प्रभात खबर 'सुरभि', लल्लनटॉप, प्रजातंत्र, जानकीपुल, कविताकोश आदि में लेख, कविताएँ, कहानियाँ प्रकाशित। अब तक दो किताबें “ऐसी-वैसी औरत” हिन्द युग्म प्रकाशन, दिल्ली एवं "मैं से माँ तक" राजपाल एंड सन्स, दिल्ली द्वारा प्रकाशित।

‘मेरा लेखन तभी सार्थक है, जब कोई एक व्यक्ति भी कुछ अच्छा और सही करने के लिए प्रेरित हो सके’

मेरे लेखन का उद्देश्य यही है कि कोई एक व्यक्ति भी कुछ अच्छा और सही करने के लिए प्रेरित हो सके तो मैं अपना लेखन सार्थक मानूँगी। मेरी आगामी दो किताबें भी इसी उद्देश्य के साथ आ रही हैं। जिनमें से एक उपेक्षित स्त्रियों को केंद्र में रखकर लिखा गया कहानी संग्रह है और दूसरी किसानों से जुड़ी, खेती से जुड़ी, असल समस्याओं और किसानों के जीवन के भीतर की कहानी पर आधारित है।

क्या रोजगार-शिक्षा में नैतिकता और मूल्य पिछले जमाने की बात हो चुकी हैं?

जो विद्यार्थी गलत तरीके से पैसे देकर शिक्षक की नौकरी पा भी लें तो वे क्या पढ़ाएँगे और क्या नीति की बातें सिखाएँगे? बात सिर्फ शिक्षकों की नहीं है। धाँधली करके प्राप्त की गई किसी भी नौकरी के किसी भी पर पहुँचा अधिकारी क्या उस पद के साथ ईमानदार रह पाएगा? क्या वह आगे भी रिश्वतखोरी नहीं करेगा?

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