Friday, February 26, 2021
Home विविध विषय कला-साहित्य 'मेरा लेखन तभी सार्थक है, जब कोई एक व्यक्ति भी कुछ अच्छा और सही...

‘मेरा लेखन तभी सार्थक है, जब कोई एक व्यक्ति भी कुछ अच्छा और सही करने के लिए प्रेरित हो सके’

अपनी बहुचर्चित पुस्तक 'मैं से माँ तक़' और 'ऐसी वैसी औरत' (जागरण-नील्सन बेस्ट सेलर) के अलावा अंकिता जैन वर्तमान में किस तरह से एक प्रेरणाश्रोत बनकर महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिशाल पेश करती हैं।अंकिता जैन ऑपइंडिया के साथ आज शेयर कर रही हैं अपने संघर्ष से सशक्तिकरण तक का अपना सफर।

महिलाओं को किसी एक विशेषण में समेटने की कोशिश करना एक नादानी से ज्यादा कुछ नहीं हो सकता है। महिलाएँ एक माँ, बेटी, बहन, औरत होने के साथ-साथ कितने ही रूपों में अन्य सामाजिक दायित्व भी निभाती हैं, अंकिता जैन इसका एक उदाहरण हैं। अपनी बहुचर्चित पुस्तक ‘मैं से माँ तक़’ और ‘ऐसी वैसी औरत’ (जागरण-नील्सन बेस्ट सेलर) के अलावा अंकिता जैन वर्तमान में किस तरह से एक प्रेरणाश्रोत बनकर महिला सशक्तिकरण की एक मजबूत मिशाल पेश करती हैं।अंकिता जैन ऑपइंडिया के साथ आज शेयर कर रही हैं अपने संघर्ष से सशक्तिकरण तक का अपना सफर।

लेखन जगत में मेरी यात्रा 2011 में शुरू हुई थी। शुरुआत फेसबुक से ही हुई थी। फिर सफ़र आगे बढ़ा और रेडियो के लिए कहानियाँ लिखीं, संपादन और अनुवाद का काम किया, घोस्ट राइटिंग की, और 2017 में पहली हिंदी किताब ‘ऐसी वैसी औरत’ आई।

इसी बीच शादी हुई और मैं छत्तीसगढ़ के आदिवासी बाहुल्य इलाके में पहुँच गई। वहाँ मेरे पति (समर्थ) खेती-बाड़ी करते हैं। रसायन मुक्त खेती। वे एक वैज्ञानिक हैं और पहले बेल्जियम की सरकारी रिसर्च लैब में शोधकर्ता थे। वहाँ वे जब आस-पास के गाँवों के किसानों को देखते, तो उनके आगे उन्हें अपने यहाँ के किसानों की दरिद्र हालत पर दुःख होता। वह ही उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट था, जब वे विदेश में नौकरी छोड़कर स्वदेश लौटे और उन्होंने छोटे किसानों के लिए कुछ करने के बारे में सोचा।

शुरुआत में यह कठिन लगता था क्योंकि शिक्षा बिल्कुल अलग विषय में हुई थी, लेकिन किताबों का साथ और शोध की प्रवृत्ति ने उनकी राह आसान बनाई। उनके पास पैतृक ज़मीन थी, जिस पर उन्होंने विभिन्न प्रकार की फसलों के साथ रसायन मुक्त खेती के प्रयोग शुरू किए। सफलता मिलने लगी तो गाँव-गाँव जाकर किसानों को प्रशिक्षण देना शुरू किया। अब तक लगभग 300 गाँवों के किसानों से जुड़कर वे उन तक रसायन मुक्त खेती के तरीके पहुँचा चुके हैं। कई किसानों ने उनकी बताई राह पर चलना भी शुरू किया है।

रसायन मुक्त खेती के प्रयोगों के दौरान ही उन्होंने रसायन मुक्त खाद एवं दवाइयाँ बनाने के प्रयोग शुरू किए। जब वे सफल रहे तो उन्हें बाज़ार में उतारा। ऐसा नहीं था कि जैविक उत्पाद बाज़ार में उपलब्ध नहीं थे, लेकिन अधिकांश उत्पादों में मिलावट और छल पाया। साथ ही, उनकी कीमतें इतनी अधिक होतीं, कि एक छोटा किसान उसे खरीदने से पहले ही जैविक खेती से विरक्त हो जाए।

अतः समर्थ का मुख्य उद्देश्य कम से कम कीमत पर शुद्ध रसायन मुक्त उत्पाद किसानों तक पहुँचाना एवं उन्हें स्वयं रसायन मुक्त खाद एवं दवाइयाँ बनाना सिखाना था। मैं पिछले चार वर्षों में उनके इस कार्य में सहयोगी रही हूँ। और वे मेरे लेखन में सहयोगी रहे।

मेरी दूसरी किताब ‘मैं से माँ तक’ मैं उनके सहयोग की वजह से ही लिख पाई। अन्यथा मातृत्व, प्रेग्नेंसी के नौ माह, और उस दौरान भारतीय स्त्रियों के सामने आने वाली कठिनाइयों के बारे में मुखर होकर लिखना एक ‘बहु’ के लिए आसान नहीं होता।

अधिकांश स्त्रियाँ माँ बनने के दौरान काम से ब्रेक ले लेती हैं। मेरे जीवन में लेखन मुख्य रूप से उसी दौर में शुरू हुआ। मैं माँ बन रही थी, बनी और अब बच्चे के साथ भी काम करती हूँ, रुकना या ब्रेक लेना नहीं चाहती। ऐसा नहीं है कि कठिनाइयों ने परेशान नहीं किया, लेकिन रुक जाऊँगी तो पीछे छूट जाऊँगी, बस यही सोच कर काम में लगाए रखती हूँ।

मैंने जब यह कॉलम लिखना शुरू किया, तो ढेर सारी महिलाओं के संदेश आते। वे सभी किसी न किसी समस्या से जूझते हुए अपने नौ माह काट रही थीं। ऐसे में मुझमें वे डिजिटल सहेली पातीं और अपना मन हल्का करतीं। आज यह किताब के रूप में है और ख़ुशी की बात यह है कि महिलाओं के अलावा पुरुषों से भी इस किताब पर सुंदर और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिलती है।

मेरे लेखन का उद्देश्य यही है कि कोई एक व्यक्ति भी कुछ अच्छा और सही करने के लिए प्रेरित हो सके तो मैं अपना लेखन सार्थक मानूँगी। मेरी आगामी दो किताबें भी इसी उद्देश्य के साथ आ रही हैं। जिनमें से एक उपेक्षित स्त्रियों को केंद्र में रखकर लिखा गया कहानी संग्रह है और दूसरी किसानों से जुड़ी, खेती से जुड़ी, असल समस्याओं और किसानों के जीवन के भीतर की कहानी पर आधारित है।

मैं और समर्थ दोनों ही इसी उद्देश्य के साथ आगे बढ़ रहे हैं कि सकारात्मक रहते हुए इस देश और समाज के लिए कुछ कर पाएँ। इन दिनों समर्थ प्लास्टिक से तेल निकालने की मशीन बना रहे हैं। हमारा बिज़नेस स्टार्टअप इंडिया के तहत रजिस्टर्ड है और हमें सरकार की तरफ से लोन के अलावा गाइडेंस भी मिलती है।

यह इस तरह का पहला एक्सपेरिमेंट नहीं है। दुनियाभर में इसके लिए काम हुआ है और कुछ जगहों पर सफलतापूर्वक प्लास्टिक से तेल निकाला भी जा रहा है। हमारे प्रयोग में जो नई कोशिश है वह है; छोटे-छोटे गाँव और नगरों के लिए न्यूनतम ख़र्च में एक मशीन तैयार करना जो नॉन-रीसायकल या डिस्पोजल प्लास्टिक से तेल निकाल सके। जो तेल निकलेगा वह केरोसीन और डीज़ल के बीच की या कई बार डीज़ल जितनी ही गुणवत्ता का रहेगा और उस तरह से इस्तेमाल किया जा सकेगा।

हमारी कोशिश है कि गाँव वालों के लिए एक ऐसी मशीन बन सके जो उन्हें उन्हीं के गाँव में उपयोग की जा रही प्लास्टिक से तेल निकाल सके और वे उस तेल का प्रयोग रोजमर्रा के कामों में कर सकें। यह प्लास्टिक से तेल निकालने का सबसे अच्छा तरीका जिसकी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार का प्रदूषण नहीं होगा। हमारा उद्देश्य बस इतना है कि प्रकृति और समाज स्वस्थ रहें, ख़ुश रहें। 

अंकिता जैन जशपुर छतीसगढ़ की रहने वाली हैं। इंजीनियरिंग के बाद विप्रो इंफोटेक में काम कर चुकी हैं। इसके अलावा सीडैक, पुणे में बतौर रिसर्च एसोसिएट एक साल रहीं। साल 2012 में भोपाल के एक इंजीनियरिंग इंस्टिट्यूट में असिस्टेंट प्रोफेसर रहीं। इस सबके बावजूद उनकी दिलचस्पी लेखन और कृषि में है।

  सहयोग करें  

एनडीटीवी हो या 'द वायर', इन्हें कभी पैसों की कमी नहीं होती। देश-विदेश से क्रांति के नाम पर ख़ूब फ़ंडिग मिलती है इन्हें। इनसे लड़ने के लिए हमारे हाथ मज़बूत करें। जितना बन सके, सहयोग करें

अंकिता जैनhttp://www.ankitajain.in
बनस्थली विद्यापीठ से एम्.टेक कंप्यूटर साइंस. स्पेशलाइजेशन आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस। विप्रो गुडगाँव में एप्लीकेशन डेवलपर, सीडेक-पुणे में रिसर्च एसोसिएट एवं बंसल इंस्टिट्यूट ऑफ़ रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी भोपाल में बतौर असिस्टंट प्रोफेसर काम कर चुकी हैं। 2012 में रिलीज़ हुए भारत के सबसे बड़े फ़्लैश मोब गीत “आय लव यू मुंबई… मुंबई 143” के बोल लिखे. इस गीत को लिम्का बुक ऑफ़ नेशनल रिकॉर्ड में भी स्थान मिला। रेडियो-ऍफ़एम् के दो प्रसिद्ध शो “यादों का इडियट बॉक्स विथ नीलेश मिश्रा” एवं “यूपी की कहानियाँ” में दो दर्जन कहानियाँ लिखीं। मध्यप्रदेश बायो-डाइवर्सिटी बोर्ड द्वारा बनायी “धान” पर आधारित डाक्यूमेंट्री की स्क्रिप्ट राइटर। अहा ज़िन्दगी, प्रभात खबर 'सुरभि', लल्लनटॉप, प्रजातंत्र, जानकीपुल, कविताकोश आदि में लेख, कविताएँ, कहानियाँ प्रकाशित। अब तक दो किताबें “ऐसी-वैसी औरत” हिन्द युग्म प्रकाशन, दिल्ली एवं "मैं से माँ तक" राजपाल एंड सन्स, दिल्ली द्वारा प्रकाशित।

संबंधित ख़बरें

ख़ास ख़बरें

‘अंकित शर्मा ने किया हिंसक भीड़ का नेतृत्व, ताहिर हुसैन कर रहा था खुद का बचाव’: ‘द लल्लनटॉप’ ने जमकर परोसा प्रोपेगेंडा

हमारे पास अंकित के परिवार के कुछ शब्द हैं, जिन्हें पढ़कर आज लगता है कि उन्हें पहले से पता था कि आखिर में न्याय तो मिलेगा नहीं लेकिन उसके बदले अंकित को दंगाई घोषित जरूर कर दिया जाएगा।

आमिर खान की बेटी इरा अपने संघी हिन्दू नौकर के साथ फरार.. अब होगा न्याय: Fact Check से जानिए क्या है हकीकत

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आमिर खान की बेटी इरा अपने हिन्दू नौकर के साथ भाग गई हैं। तस्वीर में इरा एक तिलक लगाए हुए युवक के साथ देखी जा सकती हैं।

‘ज्यादा गर्मी ना दिखाएँ, जो जिस भाषा को समझेगा, उसे उस भाषा में जवाब मिलेगा’: CM योगी ने सपाइयों को लताड़ा

"आप लोग सदन की गरिमा को सीखिए, मैं जानता हूँ कि आप किस प्रकार की भाषा और किस प्रकार की बात सुनते हैं, और उसी प्रकार का डोज भी समय-समय पर देता हूँ।"

‘लियाकत और रियासत के रिश्तेदार अब भी देते हैं जान से मारने की धमकी’: दिल्ली दंगा में भारी तबाही झेलने वाले ने सुनाया अपना...

प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि चाँदबाग में स्थित दंगा का प्रमुख केंद्र ताहिर हुसैन के घर को सील कर दिया गया था, लेकिन 5-6 महीने पहले ही उसका सील खोला जा चुका है।

3 महीनों के भीतर लागू होगी सोशल, डिजिटल मीडिया और OTT की नियमावली: मोदी सरकार ने जारी की गाइडलाइन्स

आपत्तिजनक विषयवस्तु की शिकायत मिलने पर न्यायालय या सरकार जानकारी माँगती है तो वह भी अनिवार्य रूप से प्रदान करनी होगी। मिलने वाली शिकायत को 24 घंटे के भीतर दर्ज करना होगा और 15 दिन के अंदर निराकरण करना होगा।

भगोड़े नीरव मोदी भारत लाया जाएगा: लंदन कोर्ट ने दी प्रत्यर्पण को मंजूरी, जताया भारतीय न्यायपालिका पर विश्वास

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नीरव की मानसिक सेहत को लेकर लगाई गई याचिका को ठुकरा दिया। साथ ही ये मानने से इंकार किया कि नीरव मोदी की मानसिक स्थिति और स्वास्थ्य प्रत्यर्पण के लिए फिट नहीं है।

प्रचलित ख़बरें

आमिर खान की बेटी इरा अपने संघी हिन्दू नौकर के साथ फरार.. अब होगा न्याय: Fact Check से जानिए क्या है हकीकत

सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि आमिर खान की बेटी इरा अपने हिन्दू नौकर के साथ भाग गई हैं। तस्वीर में इरा एक तिलक लगाए हुए युवक के साथ देखी जा सकती हैं।

UP पुलिस की गाड़ी में बैठने से साफ मुकर गया हाथरस में दंगे भड़काने की साजिश रचने वाला PFI सदस्य रऊफ शरीफ

PFI मेंबर रऊफ शरीफ ने मेडिकल जाँच कराने के लिए ले जा रही UP STF टीम से उनकी गाड़ी में बैठने से साफ मना कर दिया।

कला में दक्ष, युद्ध में महान, वीर और वीरांगनाएँ भी: कौन थे सिनौली के वो लोग, वेदों पर आधारित था जिनका साम्राज्य

वो कौन से योद्धा थे तो आज से 5000 वर्ष पूर्व भी उन्नत किस्म के रथों से चलते थे। कला में दक्ष, युद्ध में महान। वीरांगनाएँ पुरुषों से कम नहीं। रीति-रिवाज वैदिक। आइए, रहस्य में गोते लगाएँ।

शैतान की आजादी के लिए पड़ोसी के दिल को आलू के साथ पकाया, खिलाने के बाद अंकल-ऑन्टी को भी बेरहमी से मारा

मृत पड़ोसी के दिल को लेकर एंडरसन अपने अंकल के घर गया जहाँ उसने इस दिल को पकाया। फिर अपने अंकल और उनकी पत्नी को इसे सर्व किया।

केरल में RSS कार्यकर्ता की हत्या: योगी आदित्यनाथ की रैली को लेकर SDPI द्वारा लगाए गए भड़काऊ नारों का किया था विरोध

SDPI की रैली में कुछ आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी, जिसके खिलाफ हिन्दू कार्यकर्ता प्रदर्शन कर रहे थे। मृतक नंदू के एक साथी पर भी चाकू से वार किया गया, जिनका इलाज चल रहा है।

‘अंकित शर्मा ने किया हिंसक भीड़ का नेतृत्व, ताहिर हुसैन कर रहा था खुद का बचाव’: ‘द लल्लनटॉप’ ने जमकर परोसा प्रोपेगेंडा

हमारे पास अंकित के परिवार के कुछ शब्द हैं, जिन्हें पढ़कर आज लगता है कि उन्हें पहले से पता था कि आखिर में न्याय तो मिलेगा नहीं लेकिन उसके बदले अंकित को दंगाई घोषित जरूर कर दिया जाएगा।
- विज्ञापन -

 

हमसे जुड़ें

292,062FansLike
81,844FollowersFollow
392,000SubscribersSubscribe