Monday, August 2, 2021
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Guest Author

UP में सपा-बसपा बेचैन क्यों: कोरोना प्रबंधन पर WHO की तारीफ या मुजफ्फरनगर दंगे और कैराना पलायन को भूल आगे बढ़ने का डर?

उत्तर प्रदेश में दंगाइयों पर जिस तरह से नकेल कसा गया, कानून व्यवस्था को दुरुस्त किया गया, यह सिर्फ एक कुशल मुख्यमंत्री के द्वारा ही संभव था।

बाड़ी के पटुआ तीत: मात्र एक दिन में पूरे इजरायल की आबादी से ज्यादा टीका, ‘बुद्धिजीवी’ खोज रहे विदेशी मीडिया की रिपोर्ट

दूसरे शब्दों में कहें तो भारत ने एक दिन में लगभग पूरे इजरायल का टीकाकरण कर दिया। मगर इसे विदेशी मीडिया प्रतिशत में बताएगी और...

मोगा हत्याकांड: RSS के 25 स्वयंसेवकों ने बलिदान देकर खालिस्तानी आतंकियों की तोड़ी थी ‘कमर’

25 जून की सुबह मोगा में RSS की शाखा, सामने खालिस्तानी आतंकी... बावजूद कोई भागा नहीं। ध्वज उतारने से इनकार करने पर गोलियाँ खाईं लेकिन...

जिसकी नींव पर बुलंद हुआ संघ का वट वृक्ष, जिसने गुरु की जगह भगवा ध्वज को किया स्थापित

केशव बलिराम हेडगेवार ने सरसंघचालक रहते जो आदर्श स्थापित किए उसके कारण ही RSS अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। अपने कर्मपथ पर अडिग़ है।

भारत के सदानंद मास्टर हों या चीन का थियानमेन चौक: वामपंथी छल-बल ने मानवता को दिए हैं बेहिसाब घाव

4 जून 1989 वामपंथी पाखंड का एक नमूना है। उसका इतिहास से लेकर वर्तमान तक, हिंसा और रक्त से ही सना है।

‘हेनरी’ लड़की छेड़ता था, इसलिए वामपंथियों ने उसे ‘हरि’ बना दिया: NCERT की किताबों से हिंदू घृणा की खेती, बच्चे शिकार

सवाल यह है कि ये चीजें कब बदलेंगी? बच्चों को उनकी किस्मत के भरोसा छोड़ा जाना एक गैर जिम्मेदाराना काम होगा।

तब मरीचझापी नरसंहार, अब जान बचाते हजारों बंगालियों का पलायन: सिर्फ वोटर बदले हैं, बंगाल की राजनीतिक वही है

आज जो बंगाल में हो रहा, वो बंगाल में पहले वामपंथियों और फिर टीएमसी की शासन में फैलाई गई वैमनस्यता और घृणा की पुरानी राजनीति की परिणति है।

कोरोना, पर्यावरण और प्रदूषण: सरकार के भरोसे नहीं… हमने जो बोया है, उसका समाधान हमें ही है खोजना

"आपातकाल में मरीज़ को ऑक्सीजन सिलेंडर लगा कर ही ठीक करना होगा पर स्थाई समाधान चाहिए तो प्रदूषकों को रोकने के लिए पौधे लगाने ही होंगे।"

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