Monday, May 25, 2020
12 कुल लेख

Devesh Khandelwal

Devesh Khandelwal is an alumnus of Indian Institute of Mass Communication, he is a research scholar and an author. Khandelwal has worked with Dr. Syama Prasad Mookerjee Research Foundation, New Delhi a forum, which facilitates the convergence of ideas, positions, and visions that aspire to strengthen the nation. Devesh has made significant contribution in researching the life of Dr. Syama Prasad Mookerjee and his contributions in the field of education, industry, culture and politics. Part of his research took the shape of a book Pledge for an Integrated India: Dr. Mookerjee in Throes of Jammu-Kashmir (1951-1953) by Prabhat Prakashan (2015). His second book was Ekatma Bharat Ka Sankalp: Dr. Mookerjee and Jammu-Kashmir (1946-1953) in Hindi by Prabhat Prakashan (2018). As a Research Associate with Research & Development Foundation for Integral Humanism, New Delhi, Devesh assisted in compiling and editing the Collected Works of Deendayal Upadhyaya in fifteen volumes, which was released by Honourable President of India, Shri Ram Nath Kovind and Honourable Prime Minister of India, Shri Narendra Modi. In his stint as the Research Fellow with Makhanlal Chaturvedi National University for Journalism and Communication, Bhopal, Devesh worked on Events and Personalities: A Communication Study of Jammu and Kashmir. His research was published by the University under the title An Untold Story _ Hari Singh: The Maharaja of Jammu-Kashmir (1915-1940). He is also associated with Jammu-Kashmir Study Centre, New Delhi and is working on another book on the modern history of Jammu-Kashmir (1925-1965). He is also working as Research Fellow with Vichar Vinimay Nyas, New Delhi.

भारत में इस्लामोफोबिया कौन फैला रहा? वो अमेरिका और यूरोप जिन्होंने 14 मुस्लिम देशों पर हमले किए

अमेरिका, यूरोप के बाद इस्लामोफोबिया का प्रयोग अब भारत के लिए भी! लगातार एक झूठ फैलाया जा रहा कि मुसलमान भारत में सुरक्षित नहीं और हिंदू...

1857 का स्वतंत्रता संग्राम, मुस्लिम तुष्टिकरण और साम्प्रदायिकता… बाद में अलीगढ़ वाले सैयद अहमद की भूमिका

1857 का संग्राम अंग्रेजों के लिए 'भयभीत' करने वाला अनुभव था। इसलिए यहाँ के बाद मुस्लिम साम्प्रदायिकता के बीज को पाला-पोसा गया, उसके लिए...

जहाँ हुआ जलियाँवाला नरसंहार, 8 महीने बाद कॉन्ग्रेस ने वहीं क्यों रखा अधिवेशन: 2 फाइल, एक लेटर में छिपा है राज

भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार की होम पॉलिटिकल विभाग की फ़ाइल संख्या जनवरी 1920/77 के अनुसार कॉन्ग्रेस ने अमृतसर को अपने अधिवेशन के लिए जानबूझकर चुना, जिससे एक खास राजनैतिक मकसद को पूरा किया जा सके। दस्तावेज के अनुसार जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस उन खूनी धब्बों से ब्रिटिश सरकार को बचाने का प्रयास कर रही थी, जिनके निशान आजतक अमृतसर में मौजूद हैं।

97000 सिखों और हिंदुओं का सफाया… वो भी सिर्फ 29 साल में! आतंकी हमले आम, मानवाधिकार बेमानी है अफगानिस्तान में

अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट और मीडिया के अनुसार 1990 में वहाँ 1 लाख हिन्दू और सिख आबादी थी, जोकि अब 3000 के आसपास है। यह समझना कोई कठिन काम नहीं है कि उन 97,000 हिन्दुओं और सिखों के साथ क्या हश्र हुआ होगा।

मुसलमानों के खून से सना हुआ है ईसाई राष्ट्रवाद… लेकिन विदेशी मीडिया साध लेता है चुप्पी

लगभग हर अमेरिकी राष्ट्रपति का हाथ विश्व भर के मुसलमानों के नरसंहार में शामिल रहा है। पाकिस्तान, ईराक और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना लगभग 5 लाख निर्दोष मुस्लिम नागरिकों की हत्या कर चुकी है। लेकिन वहाँ की मीडिया को अत्याचारी दिखते हैं हिन्दू राष्ट्रवादी!

तब ब्रिटिश थे, अब कॉन्ग्रेस है: बंगाल विभाजन से दिल्ली दंगों तक यूँ समझें मुसलमानों का किरदार

कॉन्ग्रेस जैसे राजनैतिक दल पहले मुसलमानों को भड़काते हैं, फिर तुष्टिकरण को सत्ता का जरिया बनाते हैं। इसके बाद मुस्लिम नेता ऐसे मौके का नाजायज ‘फायदा’ उठाने के लिए पहले अलग संविधान, फिर अलग देश की माँग करने लगते हैं।

POJK पर जब पाकिस्तान आक्रामक ढंग से आगे बढ़ रहा था, तब हम कान में तेल डाले सो रहे थे

महात्मा गाँधी की सलाह को प्रधानमंत्री नेहरू ने अनदेखा किया। शेख ने भी अपनी बात रखने में बहुत वक्त लगा दिया। प्रधानमंत्री नरसिम्हा राव से पहले ही POJK को वापस लेने के लिए भारत सरकार को अपनी नीतियाँ स्पष्ट कर देनी थीं। लेकिन अफसोस यह है कि...

कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार: नदीमर्ग में 70 साल की महिला से लेकर 2 साल के मासूम तक को मारी गोली

नदीमर्ग तत्कालीन सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद के पैतृक गॉंव से महज 7 किमी दूर है। 54 लोगों की आबादी वाले इस गॉंव में 7 आतंकी घुसे। हिंदुओं को उनके नाम से पुकार घरों से बाहर बुलाया। चिनार के पेड़ के नीचे सबको जमा किया और...

हमसे जुड़ें

206,713FansLike
60,071FollowersFollow
241,000SubscribersSubscribe
Advertisements