Friday, January 22, 2021
17 कुल लेख

Devesh Khandelwal

Devesh Khandelwal is an alumnus of Indian Institute of Mass Communication. He has worked with various think-tanks such as Dr. Syama Prasad Mookerjee Research Foundation, Research & Development Foundation for Integral Humanism and Jammu-Kashmir Study Centre.

भीमा-कोरेगाँव: एक युद्ध जिसे इतिहासकारों ने जबरन जीत में बदल डाला

महारों की मराठाओं से कोई निजी दुश्मनी नहीं थी। यह लड़ाई कंपनी और मराठा सेना के बीच में लड़ी गई थी, जिसमें महारों ने कंपनी का साथ दिया।

कृषि सुधारों का UPA से NDA तक का सफर: जहाँ बीजेपी लगातार कर रही पहल वहीं कॉन्ग्रेस ने पूरे 10 साल बयानबाजी में बिताए

इन कानूनों का धरातल पर उतरने के बाद ही उनका विश्लेषण किया जा सकता है। उससे पहले, केंद्र और राज्यों के संबंधों को कमजोर करना अथवा संसद द्वारा पारित कानूनों को फाड़ना कोई लोकतांत्रिक अधिकार नही बल्कि अराजकता है।

‘संयुक्त राष्ट्र का काम प्रोपेगेन्डा फैलाना, ‘फ्रीडम फाइटर्स’ कहता है आतंकियों को’ – आखिर UN अब कितना विश्वसनीय?

“संयुक्त राष्ट्र को छोड़कर ऐसी कोई संस्था नहीं है, जोकि आतंकवाद को इस हद तक मान्यता देती हो!” - आतंकियों को फ्रीडम फाइटर्स कहने वाला UN अब...

सितंबर 1957 से अक्टूबर 1962 तक PM नेहरू की विदेश नीति… और चीन के कब्जे में चला गया 37544 वर्ग km

...आखिरकार सितंबर 1962 में PM नेहरू को जानकारी मिली कि लद्दाख की गलवान नदी तक के इलाके में चीनी सेना कब्जा जमा चुकी है। लेकिन...

एर्टुग्रुल: एक सिरफिरा लुटेरा, हत्यारा और बलात्कारी कैसे बन गया दक्षिण एशिया के मुस्लिमों का नायक?

एर्टुग्रुल को इतिहासकारों ने ‘गाजी’ कहकर संबोधित किया है। इस्लाम में ‘गाजी’ की उपाधि मूर्तिपूजकों, गैर-मुस्लिमों, अल्लाह को न मानाने वाले अथवा काफिरों की हत्या करने वाले को दी जाती है।

भारत में इस्लामोफोबिया कौन फैला रहा? वो अमेरिका और यूरोप जिन्होंने 14 इस्लामी देशों पर हमले किए

अमेरिका, यूरोप के बाद इस्लामोफोबिया का प्रयोग अब भारत के लिए भी! लगातार एक झूठ फैलाया जा रहा कि मुस्लिम भारत में सुरक्षित नहीं और हिंदू...

1857 का स्वतंत्रता संग्राम, मुस्लिम तुष्टिकरण और साम्प्रदायिकता… बाद में अलीगढ़ वाले सैयद अहमद की भूमिका

1857 का संग्राम अंग्रेजों के लिए 'भयभीत' करने वाला अनुभव था। इसलिए यहाँ के बाद साम्प्रदायिकता के बीज को पाला-पोसा गया, उसके लिए...

जहाँ हुआ जलियाँवाला नरसंहार, 8 महीने बाद कॉन्ग्रेस ने वहीं क्यों रखा अधिवेशन: 2 फाइल, एक लेटर में छिपा है राज

भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार की होम पॉलिटिकल विभाग की फ़ाइल संख्या जनवरी 1920/77 के अनुसार कॉन्ग्रेस ने अमृतसर को अपने अधिवेशन के लिए जानबूझकर चुना, जिससे एक खास राजनैतिक मकसद को पूरा किया जा सके। दस्तावेज के अनुसार जवाहरलाल नेहरू के पिता मोतीलाल नेहरू के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस उन खूनी धब्बों से ब्रिटिश सरकार को बचाने का प्रयास कर रही थी, जिनके निशान आजतक अमृतसर में मौजूद हैं।

हमसे जुड़ें

272,571FansLike
80,695FollowersFollow
384,000SubscribersSubscribe