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Raju Das

Corporate Dropout

न कोई बड़ा नाम, न कोई पहचान … फिर भी लोकसभा की 5वीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई NCPI, उस दल के बारे में...

लोकसभा में 19-20 सांसदों के साथ एनसीपीआई अचानक पाँचवीं सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। इससे वह एनडीए के भीतर भी एक महत्वपूर्ण सहयोगी बनकर उभरी है।

पेट्रोल पर मोदी सरकार को कोस रही कॉन्ग्रेस, लेकिन UPA सरकार की नीतियाँ मौजूदा वैश्विक हालात में लाती बर्बादी: जानें तेल बांड से घाटा...

कॉन्ग्रेस अपनी याददाश्त खोकर राजनीतिक लाभ खोज सकती है, लेकिन रिकॉर्ड साफ है- 'यूपीए ने बिल उधार छोड़ा था, और मोदी सरकार ने उसे चुकाया है।'

‘फैक्ट चेकर’ AltNews ने प्रकाशित की भ्रामक रिपोर्ट: किया दावा- वोटर लिस्ट से जुड़े EC पोर्टल के फीचर पश्चिम बंगाल में अलग, पूरे देश...

नियमों का जिक्र छोड़कर और ये सिर्फ पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट पर लागू हैं ऐसा संकेत देकर, इस तथाकथित फैक्ट चेकर ने आखिरकार फेक न्यूज फैला दी।

LPG, LNG और दुनिया को चलाने वाले अन्य पेट्रोलियम ईंधन: जानिए क्या हैं इनके बीच अंतर और भारत इन्हें कहाँ से लाता है

मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच LPG की कमी क्यों हो रही है? जानिए LNG और LPG में अंतर, भारत की तेल-गैस आयात निर्भरता का पूरा विश्लेषण।

आर्य आक्रमणकारी सिद्धांत को किया खारिज, खोजी सरस्वती नदी की धारा: जानें पद्म श्री मिशेल दानिनो को, जिन्हें ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ चैप्टर को लेकर...

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से मिशेल दानिनो को सभी सरकारी फंड वाले संस्थानों से हटा दिया गया है, वजह किताब में न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार वाला चैप्टर।

बांग्लादेश में तारीक रहमान की ताजपोशी, भारत के लिए ‘कम बुरा’ विकल्प: क्या BNP सरकार से रिश्तों में आएगा नया संतुलन?

पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारीक रहमान, 17 साल के ब्रिटेन प्रवास के बाद दिसंबर 2025 मे बांग्लादेश वापस लौटे थे।

अधिक वोट पाने से तय नहीं होती ज्यादा सीटों पर जीत: समझिए ‘वोट शेयर’ का सारा खेल, पढ़िए क्यों RJD समर्थकों के ‘वोट चोरी’...

सबसे ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ने वाली राजद को सबसे ज्यादा वोट मिला। लेकिन जीत हर निर्वाचन क्षेत्र में अलग-अलग होता है और वहाँ मिले मतों के आधार पर होता है।

वॉशिंगटन पोस्ट के फर्जी आर्टिकल से मोदी सरकार को घेरने में जुटी कॉन्ग्रेस, अडानी ग्रुप में LIC के निवेश को बना रही निशाना: जानें...

एलआईसी की खरीदारी से यूपीए को हर साल 40,000 करोड़ का टारगेट पूरा करने में मदद मिली, जबकि ग्लोबल निवेशक मुँह फेर चुके थे।