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विजय मनोहर तिवारी

25 साल मीडिया में रहे। प्रिंट और टीवी दोनों में काम। 11 किताबें प्रकाशित। पांच साल तक भारत की लगातार आठ यात्राएँ की हैं। वर्तमान में भारत में इस्लाम के फैलाव पर शोध और लेखन जारी। गरुड़ प्रकाशन से पहला भाग छपा है।

यूजीसी का ब्रांड ‘हिट’ है, जैसे गैस रिसने पर यूनियन कार्बाइड का ब्रांड ‘हिट’ था!

UGC अचानक एक 'वायरल ब्रांड' बन गया है, लेकिन गलत वजहों से। सुप्रीम कोर्ट, जातीय विवाद और एक विवादित सर्कुलर ने उसे हेडलाइंस में ला दिया।

भारत भवन के घड़े में BLF के बखेड़े

जब किसी और निजी संस्था को भारत भवन उपलब्ध नहीं है तो BLF को क्यों वंदनवार सजते हैं, वह भी 'अज्ञात कारणों' से मोटी सरकारी आर्थिक मदद सहित।

इतिहास का सच है गुलाम नबी का कथन… क्योंकि सच ज्ञानवापी की दीवारों से झाँक-झाँककर अपना पता देगा, तहखानों में चीख-चीखकर पुकारेगा

गुलाम नबी आजाद के भीतर अपने अपमानित पुरखों का कोई अंश ही होगा, जो वे साहसपूर्वक एक सच सबके सामने कह गए।

सबके परचम जलाने हैं ताकि धरती पर रहे एक ही परचम… जलते फ्रांस में विध्वंस की लपटें वही, जिस संत्रास को 1300 साल से...

इस्लाम जहाँ है, समाचारों में है। भारत में कश्मीर, बंगाल होकर केरल तक समाचार माध्यमों में उसकी चर्चा अधिकतर नकारात्मक है और फ्रांस समेत ऐसा ही अन्य देशों में है।

द केरल स्टोरी: मुल्ला के इस्लाम की कहानी, भारत के अंतहीन दुर्भाग्य की कथा

द केरल स्टोरी हर उस परिवार को देखनी चाहिए, जिसके यहाँ बेटी है, जिसके संबंधियों में किसी के यहाँ भी एक बेटी है और जिसके पड़ोस में किसी भी घर में एक बेटी है।

सेकुलर नेत्रों ने माफिया में भी देखा ‘पीड़ित मुस्लिम’, इसलिए जो विक्टिम कार्ड कभी था राजनीति में तुरुप का पत्ता अब जोकर बनकर रह...

अतीक ने अपने स्वर्णिम समय में जिस व्यवस्था का खुलकर मजाक बनाया, उसी व्यवस्था ने उसका भी मजाक खुलकर ही बनाया।

मोहम्मद अशफाक, शाहीन फिरदौस, फरहत खान, इफ्तखारुद्दीन… सरकारी मशीनरी में मध्ययुगीन विध्वंसक कलपुर्जे

मोहम्मद अशफाक, शाहीन फिरदौस, फरहत खान, इफ्तिखारुद्दीन या इनामुर्रहमान को यह भान भी नहीं होगा कि वे अपने आचरण से स्वयं को विध्वंसक विचार की मध्ययुगीन मेगा मशीन के गंदे कलपुर्जे बनाए हुए हैं!