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‘हर महीने अपने संतरों की जाँच कराएँ’: ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरूकता फैलाने निकला था युवराज सिंह का NGO, महिलाओं के अंग का बना दिया मजाक

एक यूजर ने इस विज्ञापन को लेकर दिखाई गई असंवेदनशीलता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वो इस तरह ब्रेस्ट कैंसर के मुद्दे को सेक्सुलाइज करने के खिलाफ हैं। उनकी माँ का इस बीमारी से देहांत हुआ ता और वह जानते हैं कि ये कितना गंभीर मामला है।

दिल्ली मेट्रो में छपे एक विज्ञापन पर विवाद हो गया है। विज्ञापन कथिततौर पर ब्रेस्ट कैंसर पर जागरूकता फैलाने के लिए युवराज सिंह के एनजीओ ‘YouWeCan फाउंडेशन’ का था। इस विज्ञापन में महिलाओं की ब्रेस्ट के लिए संतरा शब्द इस्तेमाल हुआ है। इसमें कहा गया है- महीने में एक बार अपने संतरों को चेक करते रहे। इससे जिंदगी बच सकती है।

नीचे पोस्टर का स्क्रीनशॉट लगा है। देख सकते हैं कि तस्वीर AI द्वारा निर्मित है और हर महिला को ब्रेस्ट कैंसर से सचेत करने के लिए संतरे दिखाए गए हैं। फोटो देखने के बाद अब हर कोई इस विज्ञापन की आलोचना कर रहा है।

लोगों का कहना है कि आखिर कैसे कोई ब्रेस्ट कैंसर पर जागरूकता फैलाने के नाम पर ऐसी अभद्रता कर सकता है। ये भी पूछा जा रहा है कि अगर पोस्टर ब्रेस्ट कैंसर पर था तो संतरे दिखाने की जरूरत क्या थी। क्या स्तन को स्तन कह सकें हमारा समाज इतना भी नहीं सहज है। दिल्ली मेट्रो से सवाल हो रहा है कि किस मानसिक रोगी ने ऐसे विज्ञापन लगाए और किसने इसे लगाने की अनमुति दी? ब्रेस्ट कैंसर घातक है जिसने 2022 में 670000 महिलाओं की जान लेली और ये लोग मजाक बनाने पर लगे हैं।

एक यूजर ने इस विज्ञापन को लेकर दिखाई गई असंवेदनशीलता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि वो इस तरह ब्रेस्ट कैंसर के मुद्दे को सेक्सुलाइज करने के खिलाफ हैं। उनकी माँ का इस बीमारी से देहांत हुआ ता और वह जानते हैं कि ये कितना गंभीर मामला है।

इतनी आलोचनाओं के बाद दिल्ली मेट्रो ने अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि वो लोग विज्ञापन देने वाले के साथ संपर्क में हैं। ऐसे विज्ञापन मेट्रो परिसर से हटवाने के लिए एक्शन लिया जा रहा है। उन्होंने ये भी बताया कि जिस विज्ञापन को लेकर विवाद हुआ है वो विज्ञापन येलो लाइन की सिर्फ एक ट्रेन पर लगा था जिसे अब हटवा दिया गया है।

वहीं यूवीकैन फाउंडेशन की ट्रस्टी पूनम नंदा का कहना है कि हमने 300000 महिलाओं को इसे लेकर शिक्षित किया है। अगर संतरा के इस्तेमाल से लोगों के स्वास्थ्य पर बात हो सकती है तो इसका इस्तेमाल एकदम सही है। भारत में ब्रेस्ट के बारे में बात करना संवेदनशील हो सकता है। इसलिए ऐसे विजुअल बनाए जाते हैं कि बात भी रखी जा सके और लोगों को आपत्ति भी न हो।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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