Friday, April 19, 2024
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पादरी के सामने ईसाई लड़की और मुस्लिम लड़के की शादी: गुस्से में चर्च, पादरी ने माँगी माफी

मामला इतना बढ़ गया कि पादरी को माफी तक माँगनी पड़ी। सिरो मालाबार चर्च के अनुसार कैनन कानूनों (ऐसा कानून जो चर्च के मिशन को पूरा करता है) का पालन इस शादी (लड़की ईसाई लेकिन लड़का मुस्लिम) में नहीं किया गया।

9 नवंबर 2020 को केरल के एक चर्च में शादी होती है। शादी की फोटो पेपर में छपती है। फोटो वायरल हो जाती है। इस शादी पर बवाल होता है। बवाल इतना कि पादरी को माफी माँगनी होती है।

और यह सब होता है इसलिए क्योंकि चर्च में हुई यह शादी दो ईसाइयों के बीच नहीं थी। इस शादी में लड़की तो ईसाई थी लेकिन लड़का मुस्लिम था। चर्च की ऊपरी सत्ता को इस शादी से आपत्ति होती है और वो जवाब भी माँगता है।

केरल के सिरो मालाबार चर्च (Syro Malabar Church) को इस शादी से दिक्कत होती है। कोच्चि में स्थित कदवंथरा सेंट जोसेफ चर्च में जिस पादरी ने यह शादी करवाई, उससे और इस शादी में भाग लेने वाले एक अन्य पादरी से सवाल-जवाब पूछा गया।

मामला इतना बढ़ गया कि पादरी को माफी तक माँगनी पड़ी। इसका कारण यह रहा कि सिरो मालाबार चर्च के अनुसार कैनन कानूनों (Canon laws, ऐसा कानून जो चर्च के मिशन को पूरा करता है) का पालन इस शादी (लड़की ईसाई लेकिन लड़का मुस्लिम) में नहीं किया गया।

माफी माँगने वाले पादरी

इस शादी में सतना के पूर्व बिशप मार मैथ्यू वानीकिजक्केल (Mar Mathew Vaniakizhakkel) ने हिस्सा लिया था। बिशप के साथ लड़का-लड़की की फोटो ही बवाल का कारण बनी। इसके बाद इस शादी की जमकर आलोचना की गई। बिशप मार मैथ्यू ने अपनी गलती मानते हुए माफी माँग ली है।

कार्डिनल मार जॉर्ज एलेनचेरी (Cardinal Mar George Alencherry) ने इसके बाद जाँच का आदेश दिया। एर्नाकुलम-अंगमाली डायोसेक (Ernakulam-Angamaly diocese) के आर्कबिशप मार एंटोनी कारिल (Mar Antony Kariyil) से रिपोर्ट माँगी गई।

इतना ही नहीं, केरल कैथोलिक बिशप काउंसिल (KCBC) ने दोनों पादरियों (एक जिसने शादी करवाई, दूसरा जो शादी में उपस्थित रहा) पर कैनन कानूनों की धज्जियाँ उड़ाने का आरोप लगाया।

केरल में ‘लव जिहाद’ और कैथोलिक पादरी

केरल में कैथोलिक पादरियों के एक संगठन ने कहा कि ‘लव जिहाद’ एक वास्तविक समस्या है। केरल के चर्च ने इसके पीछे ISIS का हाथ बताते हुए कहा था कि ‘लव जिहाद’ के जरिए कई महिलाओं का जबरन धर्मान्तरण हो रहा है। इसके जवाब में PFI जैसे मुस्लिम संगठनों ने पादरियों को चुप रहने की सलाह दी थी, क्योंकि उन्हें लगता था कि इससे CAA के खिलाफ चल रहे उपद्रव को लेकर जोश में कमी आ जाएगी।

केरल के चर्च का कहना था कि कुछ महीनों पहले केरल के जिन 21 लोगों को ISIS में शामिल कराया गया था, उनमें से आधे ईसाई थे। पादरियों का कहना था कि ‘लव जिहाद’ से सांप्रदायिक सद्भाव की भावना को ठेस पहुँच रही है। उनका ये भी आरोप था कि केरल का पुलिस-प्रशासन इस खतरे से निपटने को गंभीर नहीं है।

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ऑपइंडिया स्टाफ़
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कार्यालय संवाददाता, ऑपइंडिया

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