22 लाख घरों में संपर्क, 1500+ हिंदू सम्मेलन और शाखाओं में बढ़ते युवा: वामपंथ के गढ़ केरल को कैसे भगवा कर रहा RSS

लंबे समय से वामपंथ का मजबूत गढ़ माने जाने वाले केरल में अब वैचारिक स्तर पर एक बड़ा जमीनी बदलाव देखने को मिल रहा है। जो जगह कभी वामपंथी राजनीति का अटूट गढ़ थी वहाँ आज राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) मजबूती के साथ अपने पाँव जमा रहा है।

केरल की राजनीति पर दशकों से वामपंथ और वामपंथी विचारधारा का प्रभुत्व रहा है। शिक्षा, ट्रेड यूनियनों, साहित्य और सांस्कृतिक संस्थानों पर वामपंथ का गहरा प्रभाव रहा है। पिछले कुछ वर्षों में इस एकतरफा प्रभुत्व को धीरे-धीरे चुनौती मिल रही है और RSS इसका सबसे प्रमुख चेहरा बनकर उभरा है। संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि केरल में सिर्फ संघ की शाखाओं की संख्या ही नहीं बढ़ रही है बल्कि शाखाओं में आने वाले युवाओं की संख्या में भी काफी बढ़ोतरी हुई है।

आर्गेनाइजर की रिपोर्ट के मुताबिक, RSS के पदाधिकारियों पीएन ईश्वरन और केपी राधाकृष्णन ने बताया कि केरल में चलाए गए बड़े ‘घर-घर संपर्क अभियान’ के तहत करीब 22 लाख घरों तक पहुँच बनाई गई। इनमें लगभग 64,000 मुस्लिम और 54,000 ईसाई परिवारों के घर भी शामिल रहे। संघ नेताओं का कहना है कि इस दौरान स्वयंसेवकों को सभी समुदायों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।

देशभर में यह अभियान और भी व्यापक रहा जहाँ 10 करोड़ से अधिक घरों तक संपर्क किया गया। इसके साथ ही, शाखाओं में युवाओं की बढ़ती संख्या को ‘हिंदू जागरण’ के विस्तार का संकेत बताया गया। केरल में 1,500 से अधिक हिंदू सम्मेलनों के आयोजन ने भी संगठन को मजबूत करने में भूमिका निभाई है।

संगठनात्मक ढाँचे में बदलाव और शताब्दी वर्ष पर फोकस

संघ ने केरल में अपने संगठनात्मक ढाँचे में बदलाव का भी ऐलान किया है। अभी राज्य को उत्तर और दक्षिण केरल प्रांतों में बाँटा गया है जिसे अब तिरुवनंतपुरम, एर्नाकुलम और कोझिकोड संभागों में पुनर्गठित किया जाएगा। यह बदलाव संघ के शताब्दी वर्ष (2025-26) के मद्देनजर किया जा रहा है ताकि संगठनात्मक कार्यों को और प्रभावी बनाया जा सके।

बैठक में संघ प्रमुख डॉ मोहन भागवत और दत्तात्रेय होसबाले ने विभिन्न सत्रों में मार्गदर्शन दिया। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रवाद को बढ़ावा देने वाले कदमों, मणिपुर में घटती हिंसा और देश को नक्सलवाद प्रभाव से मुक्त करने की दिशा में उठाए गए प्रयासों की भी सराहना की गई।