फिदायीन बनने के लिए जैश से जुड़ीं 5000 खातून, 40 मिनट की क्लास में लें रहीं सुसाइड बॉम्बर बनने की ट्रेनिंग: बोलीं- अब जिंदगी का मकसद मिल गया है

जैश-ए-मोहम्मद के महिला विंग जमात-उल-मोमिनात को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मसूद अजहर के दावे के अनुसार सिर्फ कुछ हफ्तों में 5,000 महिलाएँ इसमें शामिल हो चुकी हैं और उन्हें आत्मघाती हमलों (Suicide Missions) के लिए ट्रेनिंग दी जा रही है।

ऑनलाइन जिहादी प्रशिक्षण और नेटवर्क विस्तार

NDTV की रिपोर्ट के अनुसार, जैश अब महिलाओं को कट्टरपंथ और जिहादी सोच से जोड़ने के लिए ‘तुफतुल मोमिनात’ नाम का ऑनलाइन कोर्स चला रहा है, जिसमें हर प्रतिभागी से 500 पाकिस्तानी रुपए चंदा लिया जा रहा है और क्लास 40 मिनट की होती है। इन क्लासों का संचालन मसूद अजहर की बहन सादिया, समीरा और पुलवामा हमले के साजिशकर्ता उमर फारूक की बीवी अफीरा कर रही हैं।

मसूद अजहर का दावा है कि यह महिला विंग अब इतनी तेजी से बढ़ रही है कि इसे जिला स्तर पर संगठित करने की जरूरत है, जहाँ हर जिले में एक महिला प्रमुख नियुक्त होगी और काम बाँटा जाएगा। मसूद ने अपनी पोस्ट में यह भी लिखा कि महिलाएँ इस जिहादी संगठन में जुड़ने के बाद खुद को बदलता हुआ महसूस कर रही हैं और इसे जन्नत का रास्ता बताकर भावनात्मक रूप से प्रभावित किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, POK के हर जिले में जमात-उल-मोमिनात के दफ्तर बनाए जाने की भी तैयारी है। इन दफ्तरों में भर्ती से लेकर कथित आतंकी ट्रेनिंग तक की प्रक्रिया पूरी होगी। इस विंग में शामिल कुछ महिलाओं ने चिट्ठी लिखकर बताया है कि जमात से जुड़ने के बाद उन्हें अपनी जिंदगी का मकसद मिल गया है।

भारत में सक्रियता और बढ़ता सुरक्षा खतरा

खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले हैं कि यह महिला विंग सिर्फ पाकिस्तान में नहीं बल्कि भारत में भी नेटवर्क फैला रही है, क्योंकि हाल ही में गिरफ्तार की गई डॉक्टर शाहीन सईद को भारत में जमात-उल-मोमिनात की हेड बनाया गया था। एजेंसियों का मानना है कि यह आतंकी मॉडल ISIS, हमास और LTTE की तरह महिलाओं को आत्मघाती हमलों में इस्तेमाल करने की दिशा में बढ़ रहा है।

पाकिस्तान जहाँ अंतरराष्ट्रीय मंचों पर FATF नियमों के पालन का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर उसके पाले हुए आतंकी संगठन अब मजहबी पढ़ाई और महिला सशक्तिकरण की आड़ में नई भर्ती कर रहे हैं। मसूद अजहर का यह कदम साबित करता है कि आतंकवाद अब नए तरीके से सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए जमीनी भर्ती मॉडल से डिजिटल उग्रवाद की ओर तेजी से शिफ्ट हो चुका है।