जम्मू कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के लोलाब क्षेत्र के चांदिगाम में दशकों के दर्द और विस्थापन के बाद कश्मीरी पंडितों ने अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत के एक महत्वपूर्ण हिस्से को पुनः प्राप्त किया है। इसकी जानकारी BJP जम्मू कश्मीर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर दी।
After decades of pain and displacement, Kashmiri Pandits have reclaimed a sacred piece of their heritage in Chandigam, Lolab, Kupwara.
— BJP Jammu & Kashmir (@BJP4JnK) April 29, 2026
The Modi Government’s era marks this historic moment of justice, faith, and cultural restoration in Kashmir. pic.twitter.com/KJlzTDm0AH
यह घटनाक्रम उन परिवारों के लिए भावनात्मक महत्व रखता है, जिन्हें 1990 के दशक में आतंकवाद और असुरक्षा के माहौल के कारण घाटी छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। लंबे समय से अपने पुश्तैनी स्थलों और धार्मिक पहचान से दूर रहे समुदाय के लिए यह वापसी सिर्फ जमीन या संपत्ति का नहीं, बल्कि आस्था, पहचान और इतिहास से जुड़ने का प्रतीक है।
इस्लामी कट्टरपंथियों ने तोड़ा था मंदिर और आश्रम
‘कश्मीरी हिन्दू’ नाम के एक फेसबुक पेज पर बताया गया है कि 1990 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने इस मंदिर और आश्रम पर कब्जा कर न सिर्फ उसे लूटा और जलाया बल्कि ध्वस्त कर दिया था। अब उसी पवित्र स्थल का भूमि पूजन किया गया है और जल्दी ही यहाँ एक भव्य मंदिर और आश्रम का निर्माण किया जाएगा।
स्थानीय स्तर पर इस पहल को लेकर उत्साह देखा जा रहा है और इसे सामाजिक समरसता तथा सांस्कृतिक पुनर्स्थापन की दिशा में एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से हुए तमाम प्रयासों के चलते विस्थापित समुदायों के पुनर्वास और उनके अधिकारों की बहाली की उम्मीद मजबूत हुई है।
हालाँकि इस तरह की पहलों को स्थायी और व्यापक बनाने के लिए सुरक्षा, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है, ताकि लौटने वाले परिवार स्थायी रूप से बस सकें और सामान्य जीवन जी सकें।

