लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बीच हल्की-फुल्की नोकझोंक हो गई। अखिलेश यादव ने गाजियाबाद और दिल्ली जैसी सीटों के मतदाताओं की संख्या पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जो आँकड़े पेश किए जा रहे हैं वे वर्तमान स्थिति के हिसाब से कम हो सकते हैं। अखिलेश ने सुझाव दिया कि गाजियाबाद जैसे क्षेत्र में मतदाता संख्या बताई जा रही संख्या से दोगुनी हो सकती है।
अमित शाह तुरंत खड़े हुए और अखिलेश पर चुटकी लेते हुए बोले, “मान्यवर, इन्हें तो ये भी नहीं पता ये हमारे पक्ष में तर्क दे रहे हैं या विपक्ष में! आप तो हमारा ही पक्ष मजबूत कर रहे हैं।” शाह ने विस्तार से समझाया कि सरकार जनगणना के बाद परिसीमन क्यों ला रही है। उन्होंने याद दिलाया कि 1971 में इंदिरा गाँधी सरकार ने सीटों की संख्या फ्रीज कर दी थी। इसके कारण जनसंख्या बढ़ने के बावजूद सीटें नहीं बढ़ीं।
गृह मंत्री ने आँकड़े पेश करते हुए कहा कि देश में 127 सीटें ऐसी हैं जहाँ 20 लाख से ज्यादा मतदाता हैं। मलकाजगिरी, बेंगलुरु उत्तर, बेंगलुरु दक्षिण, गाजियाबाद जैसी सीटों पर 27 से 29 लाख मतदाता हैं। उत्तर-पश्चिम दिल्ली में 27 लाख और कुछ सीटों पर 48 लाख तक वोटर हैं। शाह ने तर्क दिया कि ‘एक वोट, एक मूल्य’ का सिद्धांत टूट रहा है। कहीं 45 लाख लोगों पर एक सांसद तो कहीं सिर्फ 6 लाख पर।
अमित शाह ने अखिलेश को घेरते हुए कहा कि जो समस्याएँ अखिलेश बता रहे हैं उन्हीं का समाधान 2026 के बाद परिसीमन से होगा। सीटों की संख्या बढ़ेगी और हर नागरिक के वोट की कीमत बराबर होगी। उन्होंने विपक्ष से अपील की कि जनगणना और परिसीमन में सहयोग करें।

