अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर गंभीर आरोप, गोविंदानंद सरस्वती बोले- दान में मिला सोना-पैसा दबाया: SIT जाँच कर संपत्ति जब्त करने की माँग

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के चंदे को लेकर खड़ा हुआ विवाद लगातार गहराता जा रहा है। इस बीच स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने रविवार (28 जून 2026) को शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को सीधे निशाने पर लेते हुए उन पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। गोविंदानंद सरस्वती का दावा है कि राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बावजूद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने राम मंदिर के नाम पर गैर-कानूनी तरीके से भारी मात्रा में चंदा इकट्ठा किया और बाद में उसका गलत इस्तेमाल किया।

स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने इस पूरे मामले की शिकायत राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और विशेष जाँच दल (SIT) के पास दर्ज कराई है। उन्होंने माँग की है कि इस चंदा चोरी मामले में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ तत्काल एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए, अवैध रूप से इकट्ठा किए गए फंड की शत-प्रतिशत वसूली हो और उनकी कथित संपत्तियों को तुरंत जब्त किया जाए।

स्वामी गोविंदानंद सरस्वती ने कहा, “अयोध्या में राम मंदिर बनाने के नाम पर चंदा एकत्रित करने वाले लोगों में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद का नाम भी शामिल है। अविमुक्तेश्वरानंद ने एक हजार गाँवों से पैसा और सोना एकत्रित किया। मेरे गुरुदेव ने सुप्रीम कोर्ट में केस लड़कर जीत दर्ज की। गुरुजी के समय पर भी लोगों ने करोड़ों रुपए दान किए। मेरे गुरुदेव के ब्रह्मलीन होने के बाद स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने पैसे और सोने को चोरी कर लिया।”

अपनी माँगों को दोहराते हुए उन्होंने आगे कहा, “राम मंदिर मामले में एसआईटी 8 लोगों के खिलाफ एफआईआर कर उनसे वसूली कर रही है। उसी तरह स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ एफआईआर हो, क्योंकि उनके पास राम भगवान की संपत्ति है। अविमुक्तेश्वरानंद से संपत्ति जब्त कर मंदिर में समर्पित किया जाए।”

इस पूरे विवाद के केंद्र में ‘रामालय ट्रस्ट’ है, जिसका गठन 1990 के दशक में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी.वी. नरसिम्हा राव के कार्यकाल के दौरान हुआ था। इसके पहले अध्यक्ष ब्रह्मलीन शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती जी थे।

फरवरी 2020 में इसी रामालय ट्रस्ट के सचिव स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने ‘स्वर्ण संग्रह सपर्या’ अभियान की घोषणा कर देश के गाँवों से 1,008 किलो सोना इकट्ठा करने का लक्ष्य रखा था। वर्तमान में राम मंदिर का संचालन ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र ट्रस्ट’ कर रहा है, जिसके बाद से रामालय ट्रस्ट द्वारा जुटाए गए दान और सोने की पारदर्शिता को लेकर लगातार गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं।